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सीकर. देश सहित प्रदेश की माल्ट फैक्ट्रियों को सीकर का जौ रास आ रहा है। कंपनियों की प्राथमिकता के कारण सीकर जिला प्रदेश में गंगानगर और हनुमानगढ़ को पछाड़ते हुए पहले पायदान पर पहुंच गया है। हाल यह है कि सीकर के जौ की कच्चे माल के रूप में मांग लगातार बढ़ती जा रही है। सीकर मंडी में हर साल मार्च और अप्रेल माह में जौ की खरीद शुरू होते ही हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से व्यापारी सीकर पहुंच जाते हैं। व्यापारियों की माने तो अन्य जिलों की तुलना में सीकर के जौ में माल्ट की मात्रा अधिक पाई जाती है। यही कारण है कि माल्ट बनाने वाली फैक्ट्रियों का रुझान सीकर की उपज की ओर ज्यादा रहता है। जानकारों के अनुसार, जौ में स्टार्च और माल्ट कंटेंट जितना बेहतर होता है, उतनी ही गुणवत्ता वाली माल्ट तैयार होती है, और इस कसौटी पर सीकर का जौ आगे माना जाता है। जबकि सामान्य जौ का उपयोग पशु आहार और घरेलू जरूरतों में अधिक होता है, वहीं सीकर का जौ सीधे इंडस्ट्रियल काम में चला जाता है।
बोरी की खरीद प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में दो बड़ी माल्ट कंपनी की ओर से किसानों से जौ की बड़े स्तर पर खरीद कर जाती है। जौ की खरीद के लिए दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि सीकर, लोसल, लक्ष्मणगढ़, श्रीमाधोपुर, चौमूं, जयपुर, गंगानगर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों की मंडियों में पहुंचते हैं। व्यापारियों के अनुसार माल्ट कंपनियों की ओर से हर साल प्रदेश में 50 हजार से एक लाख जौ की बोरियों की खरीद की जाती है। कृषि विभाग के अनुसार हर साल जिले में औसतन 55 हजार मीट्रीक टन से ज्यादा का जौ का उत्पादन होता है। यही कारण है कि जौ के भाव गेहूं के बराबर पहुंच गए हैं।
माल्ट जौ को एक नियंत्रित प्रक्रिया से तैयार किया गया उत्पाद होता है। इसमें जौ के दानों को पहले भिगोकर अंकुरित (अंकुर निकलने तक) किया जाता है और फिर सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया से जौ में मौजूद स्टार्च शर्करा में बदलने लगता है, जो बीयर, खाद्य उत्पादों, औषधि और पशु आहार उद्योग में उपयोगी होता है। माल्ट क्वालिटी जांचने के लिए फैक्ट्रियां और व्यापारी कई मानकों पर जौ की परख करते हैं। जिसमें दाने का आकार, एकरूपता, नमी का प्रतिशत, अंकुरण क्षमता और स्टार्च कंटेट टेस्ट किया जाता है। जिससे पता चलता हे कि जौ में माल्ट बनने योग्य स्टार्च कितना है। --
माल्ट की मात्रा के कारण सीकर का जौ प्रदेश में माल्ट कंपनियों की पहली पसंद है। यही कारण है कि सीकर जिले में पिछले सालों के दौरान जौ का उत्पादन बढ़ा है। - उमेश कुमार धूड़, थोक व्यापारी अनाज
Updated on:
27 Jan 2026 12:05 pm
Published on:
27 Jan 2026 12:04 pm
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