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Khatu Shyam Mandir : बसंत पंचमी के दिन खाटूनगरी में नहीं बंटेगा पीला वस्त्र, कमेटी ने कहा, ऐसी कोई परंपरा नहीं

Khatu Shyam Mandir : खाटूश्यामजी में श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर में पीला वस्त्र बांटने की कोई परंपरा नहीं है।

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Khatu Shyam Mandir New update Basant Panchami day Khatunagari will not be distributed Yellow garments

फाइल फोटो पत्रिका

Khatu Shyam Mandir : खाटूश्यामजी में श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर में पीला वस्त्र बांटने की कोई परंपरा नहीं है। कमेटी मंत्री मानवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर भ्रामक खबरें फैलाई जा रही कि बसंत पंचमी पर श्याम बाबा का पीला वस्त्र बांटा जाएगा, जबकि ऐसा कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। हालांकि बसंत पंचमी के दिन बाबा श्याम का पीले फूलों से श्रृंगार किया जाएगा।

बसंत पंचमी पर भारी संख्या में खाटूधाम में आते हैं भक्त

बसंत पंचमी का दिन श्याम नगरी ही नहीं अपितु संपूर्ण श्याम जगत के लिए खास है। आज के दिन लखदातारी श्याम का पीले रंग का अंगवस्त्र उतारकर नया वस्त्र धारण करवाने के बाद पीले फूलों से सजाया जाएगा। इस विशेष दिन के लिए देशभर से भारी संख्या में भक्त खाटूधाम में उमड़ेंगे।

बसंत पंचमी के दिन बाबा श्याम के शीश का पंचामृत से स्नान करवाकर फिर से पीले रंग का वस्त्र पहनाकर उस पर पोशाक और पीले फूलों का श्रृंगार किया जाता है। भक्त, लखदातार के इस मनोहारी रूप का दर्शन करने के लिए विशेषकर खाटूधाम आते हैं।

केसरिया रंग का होता है अंतःवस्त्र

इससे पहले उनके अंतःवस्त्र उतारे जाते हैं। यह एक केसरिया रंग का वस्त्र होता है, जो बाबा सालभर पहने रहते हैं। साल में सिर्फ एक बार बसंत पंचमी के दिन इसे बदला जाता है। बाबा को पहनाया जाने वाला अंतःवस्त्र सामान्य सा होता है। यह करीब डेढ़ से दो मीटर लंबा होता है। इसमें कोई सिलाई या सजावट नहीं होती है।

कौन हैं बाबा श्याम?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। महाभारत युद्ध में भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे। बर्बरीक के पास तीन ऐसी तीर थे, जो पूरे युद्ध को पलट सकते थे। भगवान कृष्ण ब्राह्मण के रूप में आए और उनसे शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने भी बिना संकोच किए भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया। इस पर भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को कहा कि बर्बरीक तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा। तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम अपने भक्तों के हारे का सहारा बनोगे।

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