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सर्दी में डबल अटैक: वायरल के साथ बच्चों में आई फ्लू का कहर

सीकर. सर्दी के मौसम में वायरल संक्रमण के साथ अब बच्चों में आई फ्लू (कंजंक्टिवाइटिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वच्छता में लापरवाही और सर्द हवाओं के कारण छोटे बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। अकेले कल्याण अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में रोजाना आंखों में संक्रमण से पीडित एक दर्जन से ज्यादा मरीज आ रहे हैं।

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सीकर. सर्दी के मौसम में वायरल संक्रमण के साथ अब बच्चों में आई फ्लू (कंजंक्टिवाइटिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वच्छता में लापरवाही और सर्द हवाओं के कारण छोटे बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। अकेले कल्याण अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में रोजाना आंखों में संक्रमण से पीडित एक दर्जन से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। निजी अस्पताल व क्लीनिक का आंकड़ा जोड़ें तो यह संख्या तीन से चार दर्जन तक पहुंच रही है। इनमें स्कूलों के बच्चों सहित हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की संख्या ज्यादा है। संक्रमण के कारण आंख में घाव होने के कारण तेज रोशनी से जलन और लालिमा हो जाती है। मौसमी बीमारियों से जूझने के साथ ही इन दिनों वायरल बीमारी भी लोगों को काफी ज्यादा परेशान कर रही है। क्योंकि, मौसमी बीमारी के अलावा वायरल फ्लू लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है, जो अब तेजी से फैल रही है, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। इस वायरल बीमारी की वजह से लोगों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी जुकाम और सर्दी की समस्याएं हो रही हैं. इतना ही नहीं ये वायरल फ्लू ठीक होने में लगभग एक हफ्ते का समय ले रहा है. नेत्र रोग चिकित्सकों के अनुसार आमतौर पर आई फ्लू सात से दस दिन में ठीक हो जाता है लेकिन कई बार यह दवाएं लेने और आंखों में घाव होने के कारण कई बार तीन से चार सप्ताह के दौरान भी आई फ्लू ठीक नही हो पाता है।

देरी से हो रहा ठीक

कल्याण अस्पताल के नेत्र रोग के प्रमुख विशेषज्ञ डाॅ. अरविन्द महरिया के अनुसार अस्पताल में आई फ्लू के रोजाना एक दर्जन से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। स्वच्छता का ध्यान नहीं रखने के कारण बच्चों में इस प्रकार की समस्या तेजी से बढ़ जाती है। सर्दी के दौरान इम्युनिटी कमजोर होने, धूल-मिट्टी, ठंडी हवा और गंदे हाथों से आंखें छूने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। आई फ्लू एक संक्रामक रोग है, जो एक बच्चे से दूसरे में तेजी से फैल सकता है। कई मामलों में आंखों में लालिमा, जलन, पानी आना, खुजली और सुबह उठते समय आंखें चिपकने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। आई फ्लू से संक्रमित शख्स के सम्पर्क में आने वाले शख्स की पहले एक आंख का लाल होती है। इसके बाद दूसरी आंख भी लाल हो जाती है। इसके अलावा आंखों में सूजन, खुजली आना, सुबह आंखों की पलक चिपक जाती है। कई मरीजों में बुखार के साथ गले में तेज दर्द होता है। संक्रमण शुरू होने के साथ ही धुंधला दिखाई देता है जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है।

बचाव का करें उपाय

हाथों को साबुन से बार-बार धोएं। आंखों को गंदे हाथों से नहीं छुएं। बीमार के तौलिया, रुमाल और तकिया को साझा नहीं करें। संक्रमित होने पर बच्चे को स्कूल न भेजें। आंखों में जलन या लालिमा होने पर फौरन चिकित्सक से परामर्श लें। धूल और ठंडी हवा से आंखों को बचाएं। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें, जिससे सर्दी के मौसम में आई फ्लू और वायरल संक्रमण को रोका जा सके। आंखों में संक्रमण होने पर मनमर्जी से स्टेराइड दवाएं उपयोग में नहीं लें।

इनका कहना है

आई फ्लू का वायरस म्यूटेंट होने से इसकी संक्रामकता की रफ्तार तेज है। संक्रमण होने पर आंखों को हल्के गर्म पानी से दिन में एक या दो बार ही धोएं। फ्लू होने की चपेट में आने पर उपचार में भी एक से दो सप्ताह तक का समय लग जाता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी अच्छी होती है। उनमें आई फ्लू जल्दी ठीक भी हो जाता है। संक्रमण के लक्षण नजर पर फौरन उपचार लें। डॉ. सुभाष कटेवा, नेत्र रोग विशेषज्ञ