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Sikar Horrific Road Accident: दो दिन पहले हुए सड़क हादसे से हर कोई स्तब्ध है। हादसे का एक दुखभरा पहलू भी है। मोहनी देवी के पांच बेटे और चार बेटियां हैं। परिवार संयुक्त रूप से रहता था। उनकी बहुएं बरखा देवी और तुलसी देवी सगी बहनें थीं। दोनों की शादी 25 मार्च 2002 को नवलगढ़ में एक ही दिन हुई थी। साथ पली-बढ़ी बहनों का यूं एक साथ दुनिया से जाना हर किसी को झकझोर गया।
नवलगढ़ निवासी दोनों बहनों का 23 वर्ष पहले एक साथ विवाह हुआ था। दोनों के पति भी सगे भाई है। शुक्रवार को दोनों की एक साथ अर्थी उठी तो ससुराल पक्ष के साथ साथ पीहर पक्ष के लोग भी अपने आप को संभाल नहीं पा रहे थे। मृतका तुलसी के एक बेटा एवं एक बेटी है। बरखा के भी दो बेटी एवं एक बेटा है।
सड़क हादसे में सात महिलाओं की मौत हुई थी। इनमें से छह महिलाएं एक ही परिवार से थीं, एक पड़ोसी थी। शुक्रवार को इनमें से पांच महिलाओं का अंतिम संस्कार एक ही मोक्षधाम में किया गया। चार चिताएं एक साथ जलीं। मुखाग्नि दी गई तो परिजन खुद को संभाल नहीं पाए। श्मशान घाट पर सभी की आंख नम हो गई।
अलसुबह से ही पीहर पक्ष, रिश्तेदार और आसपास के लोग घर में जुटने लगे थे। जब अंतिम बार मृतक महिलाओं के चेहरे से कफन हटाया गया तो वहां मौजूद हर शख्स रो पड़ा। मां, बेटे, बेटियां, देवर-जेठ-कोई खुद को संभाल नहीं पाया। रूंधे गलों से लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए।
मोहनी देवी के दो बेटे सऊदी अरब में काम करते हैं। हादसे की खबर मिलते ही दोनों को बुलाया गया। एक बेटा पहले ही भारत लौट आया था, जबकि दूसरा सऊदी से शुक्रवार को पहुंचा। उनकी पत्नियां भी इसी हादसे में जान गंवा चुकी थीं। बेटे के पहुंचने के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया। मां और पत्नी की एक साथ चिता जलते देख बेटे बेसुध हो गए।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के बीच एक ही चर्चा थी-एक परिवार पर टूटा यह कहर किसी को भी भीतर तक हिला देने वाला है। लोग यह कहते नजर आए कि परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ यात्रा पर निकलने से बचना चाहिए। यह हादसा केवल एक परिवार की नहीं, पूरे कस्बे की पीड़ा बन गया।
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Published on:
17 Jan 2026 10:43 am
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