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3 हजार से ज्यादा किसानों को ‘5-5 हजार’ प्रोत्साहन राशि देगी सरकार

MP News: जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले भर में 25 कलेस्टर बनाए गए है। शिवपुरी के 8 ब्लॉक शिवपुरी, करैरा, पिछोर, खनियांधाना, कोलारस, बदरवास, पोहरी व नरवर में कृषि सखी तैनात की गई है।

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farmers प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: रासायनिक रूप से तैयार हो रहे अनाज व सब्जियों से देशभर के साथ शिवपुरी जिले में भी कैंसर, किडनी व लीवर से संबंधित बीमारियों के मरीज बढ़ते जा रहे है। इस बड़ी समस्या को देखते हुए सरकार का फोकस अब जैविक खेती पर है। इस जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए शिवपुरी जिले में 3125 किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है।

यह सभी किसान जैविक तरीके से अनाज व सब्जियों के साथ फलों का उत्पादन करते है। चूंकि जैविक तरीके से खेती करने पर उत्पादन कम होता है। इसलिए सरकार इस क्षेत्र में काम करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 5-5 हजार रुपए की राशि दे रही है।

कृषि सखी तैनात

इस जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले भर में 25 कलेस्टर बनाए गए है। शिवपुरी के 8 ब्लॉक शिवपुरी, करैरा, पिछोर, खनियांधाना, कोलारस, बदरवास, पोहरी व नरवर में कृषि सखी तैनात की गई है। शिवपुरी में 5 कृषि सखी तो शेष ब्लॉकों में इनकी संख्या 3-3 है। इन सभी कृषि सखी का काम केवल किसानों को जैविक खेती के संबंध में जानकारी देते हुए उनको हर तरह की जानकारी देना है।

शिवपुरी जिले में जैविक खेती को बढ़ाने के लिए कृषि विभाग को अलग से एक करोड़ रुपए का बजट मिला मेला है और इस बजट का उपयोग जैविक खेती करने वाले किसानों को 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने के अलावा अन्य व्यवस्थाएं तैयार करने को है। इतना ही नहीं जब यह किसान किसी दूसरे किसान को जैविक खेती से जोड़ते है तो उस किसान को अलग से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी।

ऐसे होता है जैविक अनाज व सब्जियों का उत्पादन

जैविक खेती के लिए सबसे पहले किसान को बिना किसी रासायनिक खाद व दवाई के जमीन को तैयार करना पड़ती है। पहली बार में उत्पादन महज 50 फीसदी ही होता है, लेकिन फिर दो सालों में यह उत्पादन बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाता है। जैविक खेती में गोबर या पेड़-पौधों की पत्तियां से लेकर देशी चीजों का उपयोग खाद के रूप में होता है। वहीं दवाइयों के लिए गोमूत्र को पानी में मिलाकर कई दिनों तक सड़ाया जाता है। तब कहीं जाकर वह ऐसी दवाई बनती है जिससे फसलों पर आने वाले कीटों को खत्म किया जाता है।

किसान बने जैविक खेती के क्षेत्र में मिशाल

जब भी शिवपुरी जिले में जैविक खेती का नाम आता है तो कुछ किसानों के नाम सामने आते है। इनमें पोहरी क्षेत्र से अरविंद सिंह तोमर जो कि कई साल से जैविक खेती कर रहे हैं। इसके अलावा शिवपुरी के बड़ागांव में सुरेन्द्र सेंगर, महिम भारद्वाज, करैरा स्थित समोहा गांव के बहादुर सिंह रावत, नरवर के हाकिम सिंह कुशवाह, कोलारस संगेश्वर गांव के गोविंद सिंह दांगी सहित भौंती से रामगोपाल गुप्ता है।

कई अन्य किसान भी इस लिस्ट में शामिल हैं, जिन्होंने शुरूआत में अपने घर के हिसाब से जैविक खेती को करना शुरू किया, लेकिन कुछ किसान तो अब व्यापार के उद्देश्य से जैविक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं और लोगों को शुद्ध अनाज व सब्जी सहित फल उपलब्ध हो रहे हैं। जिले में 5 सैकड़ा किसान सब्जी व शेष किसान अनाज सहित फलों का उत्पादन जैविक तरीके से कर रहे हैं।

जिस तरह से लोग कैमीकल व फर्टिलाइजर से उत्पादित वस्तुओं को खाकर कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे है। उसको देखकर अब सरकार का सीधा फोकस केवल जैविक खेती पर है। इसके लिए जिले में 3125 किसान जैविक खेती के लिए रजिस्टर्ड हैं और हम इनको इसी महीने पहले 2-2 हजार और फिर दूसरी किस्त मिलाकर कुल 5-5 हजार को रुपए की प्रोत्साहन राशि देंगे। कई अन्य तरीके से भी इस खेती को लाभ का धंधा बनाने का पूरा प्रयास चल रहा है। - पान सिंह करौरिया, उप संचालक, कृषि शिवपुरी

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