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जिले के 123 स्कूलों में मरम्मत की आवश्यकता

श्योपुर. सरकार भले ही विकास के तमाम दावे करे, लेकिन धरातल पर सरकारी स्कूलों का आधारभूत ढांचा आज भी चरमराया हुआ है। स्थिति ये है कि ये शिक्षण सत्र 2025-26 भी बीतने को है और परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन सत्र की शुरुआत में चिह्नित किए गए जिले के 123 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की […]

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शहर के माध्यमिक विद्यालय उर्दु गांधी की दीवारों में आ रही दरार।

श्योपुर. सरकार भले ही विकास के तमाम दावे करे, लेकिन धरातल पर सरकारी स्कूलों का आधारभूत ढांचा आज भी चरमराया हुआ है। स्थिति ये है कि ये शिक्षण सत्र 2025-26 भी बीतने को है और परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन सत्र की शुरुआत में चिह्नित किए गए जिले के 123 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की मरम्मत अभी तक नहीं हुई है। जिसके चलते इन स्कूलों में पढऩे वाले नौनिहालों की जान जोखिम में ही नजर आती है।
विशेष बात यह है कि मंगलवार को श्रीजी की गांवड़ी के शासकीय प्राथमिक विद्यालय के किचन की छत गिरने के बाद फिर से सवाल उठ रहे हैं कि शासन-प्रशासन को कोई हादसा होने के बाद क्यों याद आती है और फिर जर्जर स्कूलों की मरम्मत की मांग की फाइलें इधर-उधर दौड़ती हैं। जबकि समय रहते स्कूलों की मरम्मत होनी चाहिए।

जुलाई में सर्वे कर किए थे 123 स्कूल चिह्नित

राजस्थान के झालावाड़ा जिले में 25 जुलाई 2025 को सरकारी स्कूल की छत ढहने से 7 बच्चों की मौत हो गई। जिसके बाद मध्यप्रदेश में भी जर्जर स्कूलों का आंकलन हुआ। इसी के तहत श्योपुर जिले में भी मरम्मत योग्य स्कूलों का आंकलन कर सूचीबद्ध किया गया और मरम्मत प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इसमें जिले में 123 प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मरम्मत की आवश्यकता बताई गई और 1 करोड़ 3 लाख 43 हजार रुपए के मरम्मत प्रस्ताव शासन को भेजे गए। इसके साथ ही 54 प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों के अध्ययन के लिए 75 अतिरिक्त कक्ष के प्रस्ताव राज्य शिक्षा केंद्र को भेजे गए। लेकिन अभी तक एक भी स्कूल की मरम्मत नहीं हो पाई है, जबकि छह माह का समय बीत गया और ये शिक्षण सत्र भी बीतने को है।

कहीं दीवारें दरकी तो कहीं छत झूल रही

जिले में जर्जर स्कूल भवनों का भले ही प्रस्ताव शासन को भेजा हुआ हो, लेकिन शासन से मरम्मत की राशि नहीं मिलने से इन भवनों में बच्चों के लिए बैठना जान जोखिम में डालने जैसा ही है। स्थिति ये है कि कहीं स्कूल की दीवारों में दरारें पड़ी हुई है तो कहीं स्कूल भवन की छत झूल रही है। शहर में ही शासकीय माध्यमिक विद्यालय उर्दु गांधी की दीवारों में दरारें पड़ी नजर आ रही हैं इसके साथ ही स्कूल छत का प्लास्टर झड़ रहा है। वहीं गोपालपुरा सहराना स्कूल की छत भी क्षतिग्रस्त है। ये स्कूल तो एक उदाहरण है, बल्कि जिले में कई स्कूल भवन ऐसी हालत में है।

फैक्ट फाइल

941 कुल पीएस-एमएस जिले में
691 प्राथमिक विद्यालय जिले में
250 माध्यमिक विद्यालय जिले में
123 पीएस-एमएस मरम्मत योग्य
01 करोड़ 3 लाख मांगी राशि

जिले में 123 प्राथिमक और माध्यमिक विद्यालयों की मरम्मत के प्रस्ताव जिला कलेक्टर के अनुमोदन के बाद राज्य शिक्षा केंद्र को भेज दिए थे। अभी मरम्मत की राशि नहीं आई है। राशि आते ही स्कूल भवनों की मरम्मत कराई जाएगी।

भूपेंद्र कुमार शर्मा, डीपीसी, श्योपुर