शहडोल, Apr 29, 2026

father dies during son wedding bride arrives with body
MP News: नियति का खेल भी कितना अजीब होता है, कभी-कभी शहनाइयों की गूंज एक पल में सन्नाटे में बदल जाती है और खुशियों का आंगन मातम की चादर ओढ़ लेता है। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से सामने आया है। यहां बेटे की शादी में खुशी से झूम रहे पिता की अचानक मौत हो गई। शादी की रस्मों के बीच दूल्हे के पिता की अकस्मात मौत से शादी की खुशियां मातम में तब्दील हो गईं और गहरे दुख के बीच दुल्हन ने ससुर के शव के साथ ससुराल में कदम रखा। घटना शहडोल जिले के गोहपारू के पैलवाह गांव की है।
जयसिंहनगर के गजनी गांव से धरमदास परस्ते (50) बड़े उत्साह से बेटे हरीश की बारात लेकर आए थे। सुबह विदाई की बेला थी। आदिवासी परंपरा के अनुसार विदाई से पहले हल्दी की रस्म हो रही थी। बेटा दूल्हा बना खड़ा था और पिता धरमदास खुशी में झूमते हुए बारातियों के साथ नाच रहे थे, लेकिन किसे पता था कि बेटे के घर बसाने की खुशी मना रहे पिता धरमदास के दिल की धड़कनें अचानक रुक जाएंगी। नाचते-थिरकते धरमदास अचानक गिरे और फिर नहीं उठे। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
अस्पताल में डॉक्टरों ने धरमदास को मृत घोषित कर दिया। धरमदास की मौत की खबर मिलते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। मंगल गीत चीखों में बदल गए। दुल्हन रीना (23) जो कुछ देर पहले तक अपनी नई दुनिया के सपने बुन रही थी, उसके सामने अब एक ऐसी चुनौती थी जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। घर के बाहर सजी-धजी डोली खड़ी थी और अंदर ससुर का शव। दूल्हा हरीश इस दो राहे पर टूट चुका था, एक तरफ जीवनसंगिनी का साथ शुरू हो रहा था, तो दूसरी तरफ उसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया हट गया था।
ऐसे कठिन समय में जब इंसान हिम्मत हार जाता है, समाज और अपनों ने सहारा दिया। गम के इसी साये में एक नई जिंदगी की शुरुआत हुई। यहां केवल एक दुल्हन विदा नहीं हो रही थी, बल्कि एक बेटी अपने ससुर के शव के साथ अपने नए घर की ओर बढ़ रही थी। जब दुल्हन की डोली और ससुर का शव एक साथ गजनी गांव के लिए रवाना हुए, तो देखने वाले हर शख्स की आंखें छलक उठी। रीना ने अपने ससुराल की दहलीज पर कदम खुशियों के साथ नहीं, बल्कि शोक और जिम्मेदारियों के साथ रखा। जिस घर में बहू के स्वागत की तैयारियां थीं, वहां पिता की अंतिम विदाई की तैयारी करनी पड़ी। रीना और हरीश ने इस दुख की घड़ी में एक-दूसरे का हाथ थामकर यह साबित किया कि नई जिंदगी की शुरुआत केवल उल्लास से ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के गम बांटने से भी होती है।
Published on: 29 Apr 2026 07:06 pm

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