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अंधेरे ने छीना मां का उजाला, बिजली कटी न होती तो बच जाती अमित की जान!

कच्चे मकान में आग लगने से युवक की मौत, मोहल्ले के 58 कनेक्शन में 52 उपभोक्ताओं का 56 हजार बिल जमा न होने से ट्रांसफार्मर से बंद कर दी थी सप्लाई

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कच्चे मकान में आग लगने से युवक की मौत, मोहल्ले के 58 कनेक्शन में 52 उपभोक्ताओं का 56 हजार बिल जमा न होने से ट्रांसफार्मर से बंद कर दी थी सप्लाई
शहडोल. ग्राम कठौतिया से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहां बिजली विभाग की एक कार्रवाई गरीब मां के बुढ़ापे की लाठी छीनने का कारण बन गई। शुक्रवार की रात एक कच्चे मकान में लगी आग ने न केवल गृहस्थी को राख किया, बल्कि 19 वर्षीय अमित पटेल को भी हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। ग्रामीणों का आक्रोश है कि यदि गांव में बिजली होती, तो अमित आज जिंदा होता।

जमा नहीं हुआ था बिल

बिजली कंपनी के अनुसार, कठौतिया में कुल 58 कनेक्शन हैं, जिनमें से 52 उपभोक्ताओं पर 56 हजार रुपए का बिल बकाया था। इसी वसूली के दबाव में बिजली कंपनी ने ट्रांसफार्मर से सप्लाई काट दी थी। सवाल यह है कि उन 6 उपभोक्ताओं की क्या गलती थी, जो समय पर बिल भर रहे थे?

घर का पूरा सामान जलकर हुआ खाक

आग इतनी भीषण थी कि घर में रखी नकदी, जेवर और अनाज के साथ-साथ करीब 15 से 20 क्विंटल धान भी जलकर राख हो गई, जिसे अमित ने कड़ी मेहनत से उगाकर समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए सहेज कर रखा था। रिश्तेदारों ने बताया कि अमित एक बेहद मेहनती लडक़ा था, जो अपनी मां की आंखों का तारा था। आज उसकी मेहनत और भविष्य की उम्मीदें, दोनों ही काली राख के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं।

मां की दुनिया हुई वीरान

अमित पटेल अपनी मां गीता का इकलौता सहारा था। पिता को एक दशक पहले ही खो चुकी गीता के लिए अमित ही उसकी दुनिया का केंद्र था। बड़ा भाई शादी के बाद बाहर मजदूरी करता है, ऐसे में अमित ही घर की जिम्मेदारी संभाल रहा था। हादसे के बाद मां की स्थिति मर्मांतक है। वह बार-बार अपने बेटे का नाम पुकारते हुए बेसुध हो जाती है। रोते हुए बस एक ही बात कह रही है— पहले पति गया, अब बेटा भी छिन गया। न सहारा बचा, न सिर पर छांव।

व्यवस्था की कटौती से बेबस ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, शक्रवार दोपहर करीब 2 बजे बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बकाया बिल का हवाला देते हुए पूरे कठौतिया बस्ती की सप्लाई काट दी थी। शाम होते ही गांव अंधेरे के आगोश में समा गया। देर रात जब अमित के घर की लपटें उठीं, तो चीख-पुकार मच गई। लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन उनके हाथ खाली थे। बस्ती के लोगों का कहना है कि यदि बिजली होती, तो घरों में लगे मोटर पंप चालू कर आग पर काबू पाया जा सकता था। संसाधनों के अभाव में ग्रामीण बेबस होकर लपटों को तांडव मचाते देखते रहे और देखते ही देखते सब कुछ स्वाहा हो गया।

घटना की जानकारी लगते ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई थी, लोग अपने घरों से पंप चालू कर आग बुझाने की बात कह रहे थे, लेेकिन विद्युत सप्लाई बंद होने के कारण प्रयास नहीं किया जा सका।
रामलाल पटेल, चाचा

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आग की लपटें इतनी तेज थी कि ग्रामीणों को लगा कि अमित अपने कमरे से निकलकर भाग गया होगा, लेकिन जब आग बुझी और देखा तो अलग-अलग हिस्सों में उसका शव कमरे में ही खाक हो चुका था।
कामता प्रसाद पटेल, मामा

आग किन कारणों से लगी है इसका पता लगाया जा रहा है, गांव में विद्युत सप्लाई बंद थी, ऐसा अनुमान है कि मृतक अपने कमरे में मोमबत्ती जलाकर सोया होगा, जिससे पूरे घर में आग भडक़ गई और वह भाग नहीं सका।
राघवेन्द्र तिवारी, टीआई कोतवाली

विद्युत बिल बकाया होने पर सप्लाई बंद कर दी जाती है, काठौतिया में 58 कनेक्शन में 52 उपभोक्ताओं का 56 हजार रुपए बिल बकाया था, जिसके कारण ट्रांसफॉर्मर से बिजली सप्लाई बंद की गई थी।
राजकुमार प्रजापति, कनिष्ठ अभियंता ग्रामीण

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