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जुगाड़ से खुल रहा 108 एंबुलेंस के गेट का लॉक, नहीं कराया जा रहा सुधार, मरीज नहीं खोल पाते गेट

बीना. गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है, लेकिन गाडिय़ों की मरम्मत न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। यहां तक की पीछे के गेट के लॉक खराब होने से जुगाड़ से गेट खुलते हैं। यदि इमर्जेंसी हो, तो गेट खुल नहीं पाएंगे।बीना […]

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The gate lock of the 108 ambulance is being opened with a trick, no repairs are being done

गेट खोलने के लिए बांधी गई रस्सी

बीना. गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है, लेकिन गाडिय़ों की मरम्मत न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। यहां तक की पीछे के गेट के लॉक खराब होने से जुगाड़ से गेट खुलते हैं। यदि इमर्जेंसी हो, तो गेट खुल नहीं पाएंगे।
बीना से सागर के बीच दौड़ रहीं 108 एंबुलेंस करीब पांच-पांच लाख किलोमीटर चल चुकी हैं और कई खामियां आने से मरीज परेशान होते हैं। यहां तक की पीछे के गेट खोलने के लॉक भी नहीं बदले जा रहे हैं। बाहर से गेट खोलने के लिए एक रस्सी कर्मचारियों ने बांध रखी है, जो अंदर लॉक में जुड़ी है और उसे खींचने पर बाहर से गेट खुल पाता है, लेकिन यह गेट मरीज नहीं खोल पाते हैं। गेट खोलने के लिए एंबुलेंस के अटेंडर को तत्काल पीछे जाना पड़ता है, तब गेट खुल पाते हैं। मरीज अंदर से भी गेट नहीं खोल पाते हैं। इसके बाद भी लॉक नहीं बदले जा रहे हैं। इसके अलावा भी एंबुलेंस डेमेज हो गई हैं, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एक मामला आया था, जिसमें घायल को स्ट्रेचर पर लिटाकर एंबुलेंस के गेट खुले छोडऩे के आरोप लगे हैं और इस मामले में एफआइआर भी दर्ज कराई गई है।

नहीं बदले जा रहे टायरों को
बीना की एक एंबुलेंस के पीछे के टायरों की ग्रिप नहीं है, जिससे टायर फट सकते हैं और इससे हादसा हो सकता है। इसके बाद इन्हें संबंधित कंपनी द्वारा बदला नहीं जा रहा है। जबकि टायरों को समय पर बदला जाना चाहिए, जिससे मरीज सुरक्षित अस्पताल तक पहुंच सकें।

कराया जाता है सुधार
एंबुलेंस में कोई भी खराबी आने पर तत्काल मरम्मत कराई जाती है। यदि गेट के लॉक टूटे हैं, तो वह बदल दिए जाएंगे। साथ ही टायर भी समय-समय पर बदल दिए जाते हैं। गाड़ी की सर्विसिंग नियमित कराई जाती है और ज्यादा खराबी आने पर गाड़ी बदल दी जाती है।
तरुण परिहार, मैनेजर, 108 एंबुलेंस