16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नहीं करने दिया जा काम, महाविद्यालय प्राचार्य को भेजा कानूनी नोटिस

बीना. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रेखा बरेठिया और अनुशासन वित्त समिति सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्याम सिंह ने कानूनी नोटिस भेजे हैं। यह नोटिस शासकीय विधि महाविद्यालय में कलेक्टर दर पर पदस्थ स्वीपर सोनू बामनिया को काम करने से रोकने और परिसर में न आने देने पर दिए गए हैं।नोटिस में […]

2 min read
Google source verification
Fourth class employee should not be allowed to work, legal notice sent to college principal

फाइल फोटो

बीना. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रेखा बरेठिया और अनुशासन वित्त समिति सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्याम सिंह ने कानूनी नोटिस भेजे हैं। यह नोटिस शासकीय विधि महाविद्यालय में कलेक्टर दर पर पदस्थ स्वीपर सोनू बामनिया को काम करने से रोकने और परिसर में न आने देने पर दिए गए हैं।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि प्राचार्य डॉ. बरेठिया, सोनू से घरेलू कामों के लिए बुलाया जाता था। कुछ दिनों पूर्व कर्मचारी की पुत्री के बीमार होने पर वह देखभाल के कारण प्राचार्य के घर काम करने नहीं जा सका, तो उन्होंने नौकरी से निकालने और झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद प्राचार्य ने उसे कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे वह काम नहीं कर पा रहा है। कर्मचारी का कहना कि वह विधि महाविद्यालय में पदस्थ है, जो डॉ. बरेठिया के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, लेकिन फिर भी सुरक्षा गार्डों से उसे प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। नोटिस के साथ प्राचार्य द्वारा दी जाने वाली धमकी के ऑडियो-वीडियो की रिकॉर्डिंग का भी उल्लेख किया गया है। वहीं, कर्मचारी का दिसंबर 2025 का वेतन अवैध रूप से काट लिया गया, जबकि उपस्थिति विधि महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा प्रमाणित की गई थी। वहीं, सोनू की पत्नी रीना बामनिया, जो पीजी कॉलेज में जनभागीदारी से नियुक्त हैं, उनका नाम सार्थक अटेंडेंस एप से हटा दिया गया है, जिससे उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही और काम पर आने से रोका जा रहा है, जिससे आजीविका पर संकट आ गया है।

मांगें न मानने पर चलेगा आपराधिक मुकदमा
नोटिस के माध्यम से प्राचार्य और समिति के सदस्यों से 15 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी एवं मुआवजे की मांग की गई है। ऐसा न करने पर मानहानि का सिविल और आपराधिक मुकदमा चलाने की चेतावनी दी गई है।

पूर्व में भी हटाया था कर्मचारी को
कर्मचारी ने पहले गंदगी के वीडियो बनाकर शासन को भेजे और फिर सफाई की, जिससे अतिरिक्त कक्ष मिल जाएं। वह नशा करके महाविद्यालय में आता था। एडी से भी पत्र आया है, जिसमें वैकल्पिक व्यवस्था से सुधार कराने के लिए कहा है। पूर्व में भी कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई की गई थी।
डॉ. रेखा बरेठिया, प्राचार्य, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बीना