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हनुमान अष्टक पढ़ने से सारे संकट हो जाते हैं खत्म! जिंदगी बदल सकते हैं इसके ये 10 लाभ!

Sankat Mochan Hanuman Ashtak in Hindi: संकटमोचन हनुमान अष्टक हिंदी में लाभ सहित यहां पढ़ सकते हैं। इसे पढ़ने से जीवन की हर मुसीबत से छुटकारा मिलने की मान्यता है।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 19, 2026

SankatMochan Hanuman Ashtak in Hindi

SankatMochan Hanuman Ashtak Hindi me: संकटमोचन हनुमान अष्टक हिंदी में, लाभ सहित यहां पढ़िए। (छविः एआई)

SankatMochan Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi & Benifits: धार्मिक विशेषज्ञ बताते हैं कि संकटमोचन हनुमान अष्टक जीवन के सारे दुखों को मिटाने की क्षमता रखता है। जरूरत है तो बस श्रद्धा और विश्वास से इसके नियमित पाठ की। हां, एक बात का खास ध्यान रखेें कि हनुमान जी की किसी भी स्तुति या पाठ और भक्ति करते समय राम जी का स्मरण अवश्य करें। यदि आप राम जी को केंद्र में रखकर महाबली हनुमान का सुमिरन करते हैं, तो आपका जीवन बदल सकता है।

हनुमान अष्टक कब पढ़ा जाता है? | Right Time to Read Hanuman Ashtak

उज्जैन के पंडित निलेश शांडिल्य बताते हैं, संकचमोचन हनुमान अष्टक का पाठ जीवन के संकटों, भय, रोग, दोष, और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। इसका नियमित पाठ करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। वहीं मंगलवार और शनिवार के दिन इसे पढ़ना अत्यंत शुभ होता है। सुबह-शाम, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) में पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है। किसी विशेष मनोकामना पूर्ति या बाधा निवारण के लिए आप 7, 11 या 21 बार हनुमान अष्टक का पाठ कर सकते हैं।

हनुमान अष्टक पाठ के लाभ | Benifits of SankatMochan Hanuman Ashtak

  1. संकटों का निवारण: इसके नाम से ही साफ है कि यह 'संकटमोचन' है। जीवन में आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा या भारी संकट को दूर करने के लिए ये अचूक उपाय माना जाता है।
  2. भय से मुक्ति: इसके पाठ से अकाल मृत्यु, दुर्घटना और अज्ञात भय का नाश होता है।
  3. ग्रह दोषों से शांति: सूर्य को निगलने और राहु-केतु जैसे संकटों को हरने वाले हनुमान जी की कृपा से शनि और अन्य ग्रहों के प्रकोप से राहत मिलती है।
  4. शत्रु बाधा का अंत: अहिरावण और रावण जैसे बलशाली शत्रुओं के संहार का वर्णन होने के कारण, यह विरोधियों को शांत करने में मदद करता है।
  5. मानसिक शांति और शोक निवारण: "सो तुम दास के सोक निवारो" पंक्ति के अनुसार, यह मानसिक तनाव और दुःख को दूर कर हृदय को शांति देता है।
  6. स्वास्थ्य लाभ: लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले संजीवनी प्रसंग के स्मरण से गंभीर रोगों में लाभ मिलने और जीवनी शक्ति बढ़ने की मान्यता है।
  7. कार्य सिद्धि: रुके हुए या कठिन कामों को सिद्ध करने के लिए हनुमान अष्टक का पाठ बल और ताकत देता है।
  8. बंधन मुक्ति: "बंधन काटि सुत्रास निवारो" के अनुसार, यह कोर्ट-कचहरी या किसी भी प्रकार के अनचाहे बंधनों से मुक्ति दिलाने में सक्षम है।
  9. आत्मविश्वास में वृद्धि: बाल समय में सूर्य को निगलने की शक्ति का स्मरण करने से आप में अदम्य साहस और आत्मविश्वास जाग्रत होता है।
  10. हनुमान जी की विशेष कृपा: यह स्तोत्र हनुमान जी को उनकी शक्तियों की याद दिलाता है, जिससे वे अपने भक्त की पुकार सुनकर तुरंत उसकी मदद करते हैं।

हनुमान अष्टक का अर्थ क्या है? | Hanuman Ashtak Meaning

हनुमान अष्टक संकटों के विनाश का एक दिव्य स्तोत्र है। इसमें तुलसीदास जी ने बजरंगबली के आठ चमत्कारी प्रसंगों का वर्णन बेहद खूबसूरती से किया है। बचपन में सूर्य को निगलने से लेकर, सीता माता की खोज, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत उठाना और अहिरावण का वध करने जैसे प्रसंगों के माध्यम से उनकी असीम शक्ति को बताया है। यह पाठ आध्यात्मिक बल तो देता ही है, साथ ही सांसारिक जीवन के कठिन समय में आशा की किरण भी जगाता है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से इसका गान या पाठ करते हैं, हनुमान जी उनके सभी शारीरिक, मानसिक और सांसारिक दुखों को नष्ट कर देते हैं।

संकटमोचन हनुमान अष्टक | SankatMochan Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi

बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहां पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
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बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

।। दोहा। ।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।

जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान।

रचनाः गोस्वामी तुलसीदास जी

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