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दुनिया का सबसे बड़ा पाप क्या है? प्रेमानंद जी ने बताया फिर भगवान भी नहीं करते माफ!

Premanand ji Maharaj Pravachan: प्रेमानंद महाराज ने दुनिया के सबसे बड़े पाप के बारे में बताया है। इस लेख में समझिए वह सबसे बड़ा पाप क्या है और उससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 21, 2026

Premanand ji Maharaj Pravachan: प्रेमानंद जी से समझिए, दुनिया का सबसे बड़ा पाप क्या है। (PC: AI)

Premanand ji Maharaj Latest Pravachan in Hindi: प्रेमानंद जी महाराज ने अपने हाल ही के प्रवचन में सबसे बड़े पाप के बारे में बताया है। प्रेमानंद महाराज ने समझाया कि ये ऐसा पाप , जिसे भगवान स्वयं भी माफ नहीं करते। ऐसे में हमें, इस महापाप के बारे में जानकर इससे बचना चाहिए।

सबसे बड़ा पाप क्या है? What is the biggest Sin in World?

प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही ऐसा पाप है, जिसकी कभी माफी नहीं मिलती और वो है भगवद भक्त का द्रोह। यानी किसी ऐसे व्यक्ति का अपमान करना, उसे कष्ट देना या उसके प्रति शत्रुता रखना जो भगवान की भक्ति में लीन है। महाराज श्री (Premananad ji Maharaj) के अनुसार भक्तों का अपमान करना और उन्हें कष्ट देना ही सबसे बड़ा पाप है। भगवान खुद का अपमान तो सहन कर सकते हैं, लेकिन अपने भक्त का अनादर उन्हें कभी स्वीकार नहीं होता। ऐसा करने वाले को अपने पाप की सजा जरूर मिलती है, क्योंकि यह अक्षम्य (माफी योग्य नहीं) पाप है।

भक्तों का द्रोह कब होता है?

प्रभु के भक्त का द्रोह तब होता है, जब कोई उसके लिए मन में द्वेष, शत्रुता या बुरी नीयत रखता हो। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर भक्तों को मानसिक या शारीरिक कष्ट पहुंचाने की योजना बनाता है, तो वह द्रोह की श्रेणी में आता है। शास्त्रों के अनुसार, भक्त का द्रोह करने वाले व्यक्ति को कठोर आध्यात्मिक परिणाम यानी सजा भुगतनी पड़ती है। साथ ही उसकी भक्ति और पुण्य भी नष्ट हो जाते हैं।

भक्त द्रोह के पाप से कैसे बचें? | How to Avoid Sin of Betrayal of a Devotee?

क्षमा भाव: यदि किसी के प्रति मन में कड़वाहट है, तो कारण की समीक्षा (Review) करें और उसे तुरंत माफ कर दें।
आत्म-मंथन: यह समझें, द्रोह करने से सामने वाले का कम और आपका आध्यात्मिक नुकसान ज्यादा होता है।
संवाद का मार्ग: किसी भी विवाद को मन में पालने के बजाय बातचीत और शांति से सुलझाना बेहतर होता है।

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