भारत, May 23, 2026
Pradeep Mishra Pravachan: अगर आप भी रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, तो पंडित प्रदीप मिश्रा जी की बताई यह बात आपके लिए बेहद खास हो सकती है। सनातन धर्म में सूर्य उपासना को सुख, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि सही विधि और श्रद्धा के साथ सूर्य नारायण की पूजा करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। ऐसे में अर्घ्य देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसे लेकर प्रदीप मिश्रा जी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
प्रदीप मिश्रा जी के अनुसार, जब तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें, तब गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से सूर्य की किरणें आंखों तक सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में सहायक होता है और नेत्र संबंधी समस्याओं को धीरे-धीरे कम करता है।
अर्घ्य देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सूर्य की रोशनी सीधे आपके शरीर पर पड़े। सुबह की हल्की धूप शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती है। इससे आत्मबल बढ़ता है और दिनभर सकारात्मकता बनी रहती है। धार्मिक दृष्टि से इसे सूर्य कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय माना गया है।
सूर्य देव को जल चढ़ाने से पहले स्नान अवश्य करें और साफ वस्त्र धारण करें। हमेशा तांबे के पात्र का ही उपयोग करना शुभ माना गया है। जल में लाल फूल, रोली या अक्षत यानी चावल डालने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः”मंत्र का जाप करने से मन एकाग्र होता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
रविवार की सुबह सूर्य उपासना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और अनुशासित जीवन का प्रतीक भी है। नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने वाले लोगों के भीतर आत्मविश्वास, ऊर्जा और सकारात्मक सोच का विकास होता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा में सूर्य पूजा को विशेष स्थान दिया गया है।
Updated on: 23 May 2026 02:38 pm

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