रतलाम, May 01, 2026

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रतलाम।
जितने भी संत हुए है उन सभी की एक ही विचारधारा कार्य करती है कि मानव जाति का कल्याण हो। बुद्ध उनमें से एक हैं। बुद्ध जीवन से ज्ञान को निकालकर वहीं उसको स्वयं उतारने के लिए प्रेरणा देते आए हैं। बुद्ध को समझने के लिए आधारभूत पढ़ाई की भी आवश्यकता नहीं रहती है और उनका ज्ञान इतना समसामयिक है कि सदियों से यह प्रासंगिक रहा है।
बुद्ध के सिद्धांत या शिक्षाएं पूरी तरह से मनुष्यों को पीड़ा से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से हैं और इन्हें सामूहिक रूप से धर्म या धम्म कहा जाता है। बुद्ध ने सद्गुणों को महत्व दिया: ज्ञान, दया, धैर्य, उदारता और करुणा। बौद्ध धर्म का मूल बुद्ध की शिक्षाओं से बना है वो हैं: तीन सार्वभौमिक सत्य; चार आर्य सत्य; और अष्टांगिक श्रेष्ठ पथ।
ब्रह्मांड में कुछ भी खोया नहीं है: ब्रह्मांड में सभी चीजें एक चक्र में मौजूद हैं। इस दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है। जीवन सदैव परिवर्तनशील है, नदी की तरह निरंतर बहता रहता है। बुद्ध कारण और प्रभाव के नियम पर आधारित कर्म में विश्वास करते थे। उसने सोचा कि मनुष्य जो कुछ भी बोता है, वही काटता है।
बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया। इनमें जीवन में सभी मनुष्य किसी न किसी तरह से पीड़ित हैं।
बुद्ध दुःख के कारण को इच्छाओं और आसक्ति से जोड़ते हैं। दुख को रोकना और आत्मज्ञान प्राप्त करना संभव है।
बुद्ध ने किसी के व्यवहार की जांच करने के लिए शिक्षाएं दी। इनको पंच शिला कहा जाता है। इनमें जान लेने या किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने, अहिंसा या अपरिग्रह नैतिकता का मुख्य सिद्धांत होना, स्वयं को इंद्रियों के दुरुपयोग से रोकना, नशीले पेय और नशीली दवाओं के सेवन से बचें, क्योंकि यह दिमाग पर हावी हो जाता है और व्यक्ति को स्पष्ट रूप से सोचने और वास्तविकता को देखने से रोकता है।
Published on: 01 May 2026 09:29 am

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