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राजसमंद. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों से पढ़ाई के अतिरिक्त लगातार अन्य जिम्मेदारियां भी निभवाई जा रही हैं, जिनका उल्लेख न तो बीएड परीक्षा में होता है और न ही अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में। पहले शिक्षकों को विद्यार्थियों को दूध पिलाने से लेकर विभिन्न ऑनलाइन कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी। गत माह शिक्षकों को स्कूल परिसरों में कुत्तों को भगाने का कार्य भी सौंपा गया था। अब शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की सुरक्षा की नई जिम्मेदारी शिक्षकों को दी है, ताकि स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो सके। विद्यार्थियों एवं स्कूल भवन की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सतर्क हो गया है। इसी के तहत सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को अपने-अपने स्कूल परिसर का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा ऑडिट में चारदीवारी, विद्यालय प्रवेश द्वार, रसोईघर एवं मिड-डे-मील निर्माण क्षेत्र, पानी निकासी के आउटलेट, नालियां तथा परिसर में खुले स्थानों की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता अनुसार मरम्मत सुनिश्चित करनी होगी।
इसके साथ ही प्राथमिक एवं प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों की स्कूल परिसर में आवाजाही पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यान्तर अवकाश एवं छुट्टी के समय एक शारीरिक शिक्षक अथवा अन्य शिक्षक की अनिवार्य ड्यूटी लगाई जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी, ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न हो और अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास मजबूत बना रहे।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत यदि स्कूल परिसर या आसपास किसी जीव-जन्तु की मौजूदगी से विद्यार्थियों को खतरा हो सकता है, तो उससे भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। स्कूलों के आसपास जीव-जन्तुओं से संभावित अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के लिए शिक्षकों को स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्राथमिकता के आधार पर समन्वय स्थापित कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करनी होगी।
Published on:
26 Feb 2026 01:15 pm
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