
MP News: एक किलोमीटर की दूरी हुई 60 किमी, 10 रुपए के फेर में जान दांव पर लगाकर नाव से आवाजाही करते ग्रामीण। (photo: patrika)
MP News: विकास की चमक अक्सर उन अंधेरों को ढंक लेती है, जो किसी बड़ी परियोजना के आने पर लोगों की किस्मत में लिख दी जाती है। राजगढ़ जिले का मोहनपुरा डैम इसका उदाहरण है। यहां विकास तो हुआ, लेकिन ब्यावरा व राजगढ़ के बीच बसे 50 से ज्यादा गांवों के लिए यह ऐसी 'वैतरणी' बन गया कि लोगों को रोज जान हथेली पर लेकर नाव से सफर करना पड़ रहा है।
ब्यावरा से उदयपुरिया की दूरी 1 किमी है। इसे जोड़ने वाली सड़क डूब में पानी में समा गई। जिम्मेदारों ने पुल की स्वीकृति तो दी, पर 6 साल में नहीं बना सके। अब इन गांवों के करीब 50 हजार लोगों को यदि सड़क मार्ग से ब्यावरा जाना हो तो पहले राजगढ़, फिर पचौर जाना पड़ रहा है। इससे 60 किमी का फेरा बढ़ रहा है।
ग्रामीण जगदीश रोहेला ने बताया, ग्रामीणों को नाव से ही जाना पड़ रहा है। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक 4 नावें ही 50 गांवों की लाइफलाइन हैं। पीएमजीएसवाइ के जीएम राहुल वर्मा का कहना है, मैं कुछ माह पहले ही आया हूं। पुल प्रस्तावित होगा तो प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
ग्रामीणों का नाव पर सफर शौक नहीं, मजबूरी बन गया है। रोजी-रोटी की तलाश में मजदूर तो किसान दूध और फसल बेचने के लिए नाव की सवारी करने को विवश हैं। रायपुरिया से नाव का किराया महज 10 रुपए है। यदि कोई सड़क मार्ग से जाना चाहे तो पहले उसे ब्यावरा से राजगढ़ और फिर पचोर होकर 60 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ेगी। इस ढाई घंटे के सफर पर उन्हें प्रति व्यक्ति 140 रुपए तक खर्च करना होगा। ऐसे में मजबूरन वे नाव की सवारी करने को विवश हैं।
यह तस्वीर सरकारी लापरवाही की है। क्षमता से ज्यादा लदी नाव पर एक बार में 50 लोग, 25 बाइक और दूध की भारी टंकियां ले जाई जाती हैं। जब डैम के बीचों बीच तेज हवा में नाव के डगमग करने पर सवार बच्चे, लाचार बुजुर्गों और बीमारों की सांसें भी अटक जाती हैं। हर लहर के साथ एक अनजाना डर दिल में घर कर जाता है कि कहीं यह सफर आखिरी न हो।
एमपी केकल्लूखेड़ा, चाटूखेड़ा, बाईहेड़ा, बांसखेड़ी, डोंगरपुर, खानपुरा और खुजनेर जैसे 50 से ज्यादा गांव।
हैरानी की बात ये है कि समस्या का हल कागजों पर पहले ही हो चुका है। जल संसाधन विभाग ने पुल निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 6 करोड़ का भुगतान किया, लेकिन फाइल सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही है। कुल्लूखेड़ा के रवि गुर्जर, डूमरपुर के रामनारायणसिंह, उदयपुरिया के बाबूलाल रोहेला ने बताया, सांसद रोडमल नागर, राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और विधायक नारायण सिंह पंवार से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगा चुके, पर हल नहीं निकला।
Updated on:
12 Jan 2026 02:08 pm
Published on:
12 Jan 2026 02:02 pm
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