
पोस्ट ऑफिस घोटाले में 1.91 करोड़ की हेराफेरी पर राज्य उपभोक्ता आयोग सख्त, पीड़ित दंपती को राहत(photo-AI)
Post Office Scam: छत्तीसगढ़ के रायपुर में डाक विभाग के पोस्टमास्टर ने एजेंट के साथ मिलीभगत कर खाते धारक दंपती के 1.91 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से गबन कर लिए। इसकी जानकारी तक खातेधारक को नहीं दी। इसके संबंध में लिखित शिकायत करने के बाद भी खातों को ब्लॉक नहीं किया गया।
वहीं किसी भी तरह की जानकारी तक नहीं दी गई। पूरे प्रकरण से पल्ला झाडऩे के लिए डाक विभाग ने अपने बचाव में आंतरिक जांच का हवाला देते हुए एजेंट द्वारा पासबुक में कूटरचना का दावा किया।
साथ ही यह तर्क दिया गया कि एजेंट की नियुक्ति कलेक्टर करते हैं। इसलिए उन्हें पक्षकार बनाया जाना चाहिए था। डाक विभाग द्वारा किसी भी तरह का सहयोग नहीं करने पर पीडि़त दंपती ने आयोग में शिकायत की। जहां राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा, सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों एवं पासबुक का अवलोकन किया।
जहां पता चला कि पोस्टमास्टर या विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना पासबुक जारी करना एवं आहरण संभव नहीं है। एजेंट के दोषी पाए जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करना सेवा में कमी को दर्शाता है। राज्य उपभोक्ता आयोग ने परिवाद को स्वीकार करते हुए 18 पासबुक वाले खातों की परिपक्वता राशि खातेधारक को भुगतान करने का आदेश पारित किया।
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय डाकघर रायपुर में अगस्त 2016 से नवंबर 2020 तक 19 टीडीआर खाते एवं 2 आवर्ती जमा खाता अनिल कुमार पाण्डेय ने स्वयं पत्नी एवं पुत्री के नाम पर खुलवाया। डाक बचत अभिकर्ता भूपेन्द्र पाण्डेय एवं आकांक्षा पाण्डेय द्वारा औपचारिकता पूरी की। जिसका कुल परिपक्वता राशि 1 करोड़ 97 लाख 42705 रुपए थी।
उक्त खातों को खुलवाने पूर्व के खातों की परिपक्वता राशि के पुनर्निवेश के लिए पुनर्निवेश फॉर्म एवं अंतर की राशि का पोस्ट मास्टर के नाम से चेक जारी किए गए थे। इस पर एजेंट द्वारा उक्त सभी खातों की पासबुक नियमानुसार खातेधारक को पोस्ट मास्टर के हस्ताक्षर और सील लगाकर दिया गया था।
खातेधारक ने आरोप लगाया कि डाक विभाग के पोस्टमास्टर ने एजेंट से मिलीभगत कर बिना अनुमति और बिना खातों से राशि आहरण की अनुमति दी। इस संबंध में लिखित शिकायत किए जाने के बावजूद न तो खातों को ब्लॉक किया गया और न ही किसी प्रकार की जानकारी दी गई। डाक विभाग ने अपने बचाव में आंतरिक जांच का हवाला देते हुए एजेंट द्वारा पासबुक में कूटरचना का दावा करते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
हालांकि आयोग ने दस्तावेजों और पासबुक के अवलोकन के बाद स्पष्ट किया कि पोस्टमास्टर या विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना न तो पासबुक जारी हो सकती थी और न ही खातों से राशि की निकासी संभव है। इसे देखते हुए भारतीय डाक विभाग को 45 दिवस के भीतर 18 टीडीआर खातों की परिपक्वता राशि 1 करोड़ 91 लाख 39965 रुपए 6 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज के साथ देने का फैसला सुनाया। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति का 1 लाख और वाद व्यय 15000 रुपए भुगतान करने का आदेश दिया।
Published on:
03 Feb 2026 02:41 pm

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