29 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रायपुर, May 29, 2026

Bashir Badr death: मशहूर शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन, छत्तीसगढ़ से था गहरा नाता, कवियों और शायरों ने याद किया अपनापन

Urdu Poet Bashir Badr Passes Away: उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन हो गया है। इस खबर के बाद शायरी पसंद लोगों तक शोक का माहौल है।

Bashir Badr death

महासमुंद में आयोजित कार्यक्रम मे (Photo Patrika)

Bashir Badr death: उर्दू अदब की दुनिया का एक चमकता आफताब अब हमेशा के लिए खामोश हो गया। मशहूर शायर बशीर बद्र के इंतकाल की खबर ने अदबी हलकों से लेकर आम शायरी पसंद लोगों तक को गमगीन कर दिया। उनकी गजलें सिर्फ अल्फाज नहीं थीं, बल्कि रिश्तों, मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी के बदलते मिजाज की ऐसी तर्जुमानी थीं जो हर दिल तक पहुंचती थी। कोई हाथ भी न मिलाएगा…और उजाले अपनी यादों के… जैसे अशआर आज भी लोगों की जुबान पर हैं। छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों, शायरों और कवियों ने उनसे जुड़ी मुलाकातों और यादों को साझा करते हुए उन्हें एक बेहद सादा दिल इंसान बताया।

Bashir Badr death: मेरे शेर पर खुश होकर बोले थे- इसे संभाल कर रखना

महासमुंद के कवि अशोक शर्मा बताते हैं कि 1988 में जब बशीर बद्र रायपुर आए थे, तब उन्हें महासमुंद ले जाने का अवसर मिला। वहां की साहित्यिक गोष्ठियों में उन्होंने न सिर्फ शिरकत की, बल्कि स्थानीय रचनाकारों को खुलकर सराहा भी। अशोक कहते हैं कि उनकी सादगी ऐसी थी कि बड़े शायर होने का कोई गुरूर उनमें नहीं था। बाद में भोपाल में मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने हाथों से शरबत पिलाया और घंटों साहित्य पर बातचीत की।

अशोक शर्मा, महासमुंद

अशोक बताते हैं कि उस दौर में महासमुंद में सुनने-सुनाने का बेहद जीवंत माहौल था। रायपुर से उन्हें लेकर महासमुंद पहुंचे तो जनपद सभागार में गोष्ठी हुई। वहां सरोज श्रीवास्तव, शौक जालंधरी और अन्य साहित्यकार मौजूद थे। मैंने अपनी गजलें सुनाईं, जिनमें बाप से परिचय हुआ शेर पर बशीर बद्र खासे प्रभावित हुए। बाद में मैंने अपने गजल संग्रह का नाम भी इसी पंक्ति पर रखा। वे बताते हैं कि गोष्ठी के बाद एक संगीत संध्या हुई, जिसमें साधना रहाटगांवकर ने बशीर बद्र की गजलों को सुरों में पेश किया। गजलें सुनते-सुनते उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। वह उनके जीवन का भावुक दौर था, लेकिन इसके बावजूद लोगों से उनका अपनापन कम नहीं हुआ।

महासमुंद मेरा दूसरा घर है

उन्होंने कहा था — महासमुंद मेरा दूसरा घर है, जब भी छत्तीसगढ़ आऊंगा, यहां जरूर आऊंगा। इसके बाद वे दो बार महासमुन्द आए। बाद में भोपाल में भी मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। वहां बशीर बद्र ने अपने हाथों से नाश्ता कराया और मुशायरे में मिली सोने के तार वाली शॉल भी दिखाई। बशीर बद्र की सबसे बड़ी खूबी उनका सहज और आत्मीय स्वभाव था। मैं उनकी गजलें सुना रहा था, बशीर बद्र ने गले लगा लिया।

रायगढ़ चक्रधर समारोह में मुलाकात

लेखक जयप्रकाश मानस के लिए बशीर बद्र से मुलाकात जिंदगी के सबसे यादगार साहित्यिक अनुभवों में शामिल है। वे बताते हैं कि 1997-98 के आसपास रायगढ़ के चक्रधर समारोह में उर्दू शायरी का विशेष सत्र आयोजित हुआ था, जिसमें देशभर की उर्दू अकादमियों से शायर पहुंचे थे। उस समय मैं जिला शिक्षा अधिकारी था। उर्दू शायरी पर मेरी समझ को देखते हुए मंच संचालन और बातचीत की जिम्मेदारी मुझे मिली। वे बताते हैं कि इतने बड़े शायर के सामने बोलते समय घबराहट थी लेकिन जब मैंने बशीर बद्र की मशहूर गजलें सुनाईं तो बद्र साहब बेहद खुश हुए।

जय प्रकाश

जयप्रकाश मानस याद करते हैं कि मैंने मंच से जब यह शेर पढ़ा कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से…तो बशीर बद्र ने तुरंत मुझे गले लगा लिया। वे बोले, हिंदी का आदमी और रायगढ़ जैसे इलाके से मेरी गजलें इस तरह सुना रहा है, यह कमाल है। वे बताते हैं कि बशीर बद्र का अंदाज बेहद खास था। शेर पढ़ते समय उनका हाथ कमर तक जाता, चेहरे पर मुस्कान रहती और पूरी महफिल उनकी अदायगी पर झूम उठती।

गालिब के बाद उर्दू शायरी को आम लोगों तक पहुंचाने में बशीर बद्र की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने रुमानियत से आगे बढ़कर जिंदगी के यथार्थ, रिश्तों की दूरी और मनोवैज्ञानिक स्थितियों को अपनी शायरी में जगह दी। यही कारण है कि उर्दू न जानने वाले लोग भी उनके शेर अपनी बातचीत में इस्तेमाल करते हैं।

ऑटोग्राफ बुक में लिखा शेर आज भी मेरी सबसे बड़ी पूंजी है

रायपुर के शायर और एडवोकेट फजले अब्बास सैफी कहते हैं कि बशीर बद्र जैसे शायर सदियों में पैदा होते हैं। करीब 25-30 साल पहले जब बशीर बद्र रायपुर और भिलाई के मुशायरों में आए थे, तब उनसे मुलाकात का अवसर मिला।

फजले अब्बास ने आज तक ऑटोग्राफ संभालकर रखा हुआ है।

मैंने अपनी ऑटोग्राफ बुक में बद्र साहब से दस्तखत करवाए थे। उस दौरान बशीर बद्र ने एक शेर भी लिखा, जिसे मैं आज तक अपनी सबसे बड़ी साहित्यिक धरोहर मानता हूं।

फजले अब्बास सैफी

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी थी। उनके शेर सीधे दिल में उतरते थे। यही वजह है कि मुशायरों में उनका नाम आते ही लोग बेसब्री से इंतजार करते थे। सैफी के मुताबिक बशीर बद्र ने उर्दू शायरी को महफिलों से निकालकर आम लोगों की जिंदगी तक पहुंचाया। रिश्तों, तन्हाई, मोहब्बत और बदलते दौर की बेचैनी को उन्होंने जिस अंदाज में लिखा, वह आज भी लोगों की जुबान पर है।

बशीर बद्र ने शायरी को आम आदमी की जुबान बना दिया

कवि मीर अली मीर कहते हैं कि बशीर बद्र उर्दू शायरी की ऐसी आवाज थे, जिन्हें सिर्फ उर्दू जानने वाले ही नहीं, बल्कि आम हिंदी भाषी लोग भी दिल से सुनते और दोहराते थे। बशीर बद्र ने शायरी को महफिलों और किताबों से निकालकर रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचाया। लोग बातचीत में, सोशल मीडिया पर और अपने जज्बात जाहिर करने में उनके शेरों का इस्तेमाल करते हैं।

मीर अली मीर

मीर अली कहते हैं कि बशीर बद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे बेहद सरल शब्दों में गहरी बात कह देते थे। उनकी शायरी में मोहब्बत भी थी, रिश्तों की टूटन भी, इंसानी दर्द भी और समाज की सच्चाई भी। भोपाल जैसे सांस्कृतिक शहर में रहकर उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।

वे बताते हैं कि मुशायरों में बशीर बद्र की मौजूदगी ही अलग माहौल बना देती थी। उनकी अदायगी, ठहराव और शेर कहने का अंदाज लोगों को बांधे रखता था। नई पीढ़ी के लिए भी बशीर बद्र हमेशा एक स्कूल की तरह रहेंगे, क्योंकि उन्होंने साबित किया कि बड़ी शायरी वही है जो सीधे आम आदमी के दिल तक पहुंचे।

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें