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सेहत पर सवाल :1290 डॉक्टरों के पद खाली, 5 नए कॉलेजों में कहां से लाएंगे फैकल्टी

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के स्वीकृत 2660 में 1290 पद खाली हैं। इस साल 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है। ऐसे में जब आधे पद खाली है तो नए कॉलेजों के लिए फैकल्टी कहां से आएंगे? जानकार भी कह रहे हैं कि फैकल्टी की नियुक्ति राज्य शासन के […]

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सेहत पर सवाल :1290 डॉक्टरों के पद खाली, 5 नए कॉलेजों में कहां से लाएंगे फैकल्टी

सेहत पर सवाल :1290 डॉक्टरों के पद खाली, 5 नए कॉलेजों में कहां से लाएंगे फैकल्टी

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के स्वीकृत 2660 में 1290 पद खाली हैं। इस साल 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है। ऐसे में जब आधे पद खाली है तो नए कॉलेजों के लिए फैकल्टी कहां से आएंगे? जानकार भी कह रहे हैं कि फैकल्टी की नियुक्ति राज्य शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। नए कॉलेजों को अगर मान्यता दिलानी है तो अभी से प्रयास शुरू कर दिया जाना चाहिए।

सीनियर प्रोफेसरों को डीन का अतिरिक्त प्रभार

दरअसल इन कॉलेजों के लिए सीनियर प्रोफेसरों को सप्ताहभर पहले डीन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस साल कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, गीदम व जशपुर में 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव है। इन कॉलेजों में 100 से ज्यादा फैकल्टी की जरूरत होगी। फर्स्ट ईयर के हिसाब से एनाटॉमी, बायो केमेस्ट्री व फिजियोलॉजी के प्रोफेसरों के अलावा एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति करनी होगी। वर्तमान में केवल डीन की नियुक्ति की गई है। संबंधित जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल बनाया जाएगा। ऐसे में वहां पदस्थ डॉक्टर मान्यता में खास काम नहीं आएंगे। वे स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत सेवाएं दे रहे हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंडर में आता है। ऐसे में नई नियुक्ति जरूरी है। सबसे ज्यादा 72 फीसदी सीटें सीनियर रेसीडेंट के हैं।

प्रमोशन से दूर होगी डॉक्टरों की कमी

10 सरकारी समेत प्रस्तावित 5 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए अगर शासन को डॉक्टरों की कमी दूर करनी है तो अविलंब फैकल्टी का प्रमोशन करना ही होगा। इससे फैकल्टी की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे 216 डॉक्टर प्रमोशन के लिए पात्र हैं। इनमें 110 प्रोफेसर डीन व अस्पताल अधीक्षक बनने के लिए पात्र हो गए हैं। इसके बावजूद हाल में रायगढ़ में एसोसिएट प्रोफेसर को डीन बना दिया गया है। ये डॉक्टर डीन बनने के लिए पात्र नहीं है। 106 डॉक्टर एसोसिएट से प्रोफेसर बनने की कतार में है। वहीं 80 डॉक्टर जून में एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए पात्र हो जाएंगे। डॉक्टराें का समय पर प्रमोशन नहीं होने से न पीजी की सीटें बढ़ पा रही हैं और न नई सीटें मिल पा रही हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसरों के 332 पद खाली, हो रही 125 पदों पर भर्ती

पीएससी 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती करने जा रहा है। जबकि वर्तमान में 332 पद खाली हैं। ये खाली पद 10 मेडिकल कॉलेजों के हिसाब से हैं। नए कॉलेजों में एमबीबीएस की 50-50 सीटें रहेंगी। डॉक्टरों का समय पर प्रमोशन नहीं होने से मरीजों का इलाज भी प्रभावित होता है। दरअसल जब डॉक्टरों का प्रमोशन होता है तो नीचे वाले पद खाली होंगे और इसमें नई नियुक्ति का मौका मिलेगा। कई डॉक्टर इस बात भी डरे हुए हैं कि नए कॉलेज खुल रहे हैं तो प्रमोशन कर उनका तबादला किया जाएगा। इसलिए कई बार प्रमोशन के लिए जरूरी जर्नल भी जमा नहीं कर रहे हैं।

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