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Gupt Navratri 2026: जब साधना होती है मौन और फल होता है प्रकट, जानें गुप्त नवरात्रि का रहस्य…

Gupt Navratri 2026: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी धाम, डोंगरगढ़ में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक गहन हो गया है।

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जब साधना होती है मौन और फल होता है प्रकट(photo-AI)

जब साधना होती है मौन और फल होता है प्रकट(photo-AI)

Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म परंपरा में गुप्त नवरात्रि को शक्ति आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण और रहस्यमयी पर्व माना जाता है। माघ मास में पड़ने वाली इस नवरात्रि के साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी धाम, डोंगरगढ़ में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक गहन हो गया है। यह पर्व सार्वजनिक उत्सवों से अधिक अंतर्मुखी साधना, मंत्र-जप और आत्मिक शक्ति जागरण के लिए जाना जाता है।

Gupt Navratri 2026: वर्ष में दो बार होती है गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार—माघ और आषाढ़ मास में—आती है। ‘गुप्त’ शब्द स्वयं इस पर्व की प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें साधक अपनी साधना को गोपनीय रखते हुए दिखावे से दूर रहकर देवी शक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस काल में की गई साधना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है, जिससे मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ आत्मबल में भी वृद्धि होती है।

दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व

इस नवरात्रि में देवी दुर्गा के उग्र और सिद्धिदायी स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व है। साधक मंत्र-जप, ध्यान, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत के माध्यम से शक्ति साधना करते हैं। मान्यता है कि यह साधना भय, रोग, मानसिक अस्थिरता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। सामान्य श्रद्धालु भी सरल पूजा-पाठ और संयमित जीवनचर्या अपनाकर मां की कृपा प्राप्त करते हैं।

मां बम्लेश्वरी धाम बना शांत साधना स्थल

देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र मां बम्लेश्वरी धाम, गुप्त नवरात्रि के दौरान एक शांत साधना स्थल के रूप में नजर आ रहा है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु और साधक भीड़-भाड़ से दूर रहकर मां के चरणों में ध्यान और जप में लीन रहते हैं। मंदिर परिसर में विशेष अनुशासन, स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखा गया है, जिससे साधकों को पूर्ण एकाग्रता मिल सके।

श्रद्धालुओं का विश्वास: साधना होती है विशेष फलदायी

स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि मां बम्लेश्वरी धाम में गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई साधना विशेष फलदायी होती है। यही कारण है कि हर वर्ष सीमित संख्या में ही सही, लेकिन गहरी आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचकर शक्ति उपासना करते हैं।

कुल मिलाकर, गुप्त नवरात्रि वह पर्व है जो व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर ले जाकर आंतरिक शक्ति से जोड़ता है। मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में यह नवरात्रि श्रद्धा, साधना और आत्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बनकर भक्तों को शक्ति, धैर्य और संतुलन की अनुभूति करा रही है।