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Medical College: मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को बड़ी राहत, हर साल एनपीए लेने-छोड़ने का मिलेगा विकल्प

Medical College: चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के नए आदेश से एनपीए विवाद पर विराम लगने और सैकड़ों फैकल्टी को राहत मिलने की उम्मीद है।

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चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने जारी किया आदेश (photo source- Patrika)

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने जारी किया आदेश (photo source- Patrika)

Medical College: पं. जवाहरलाल नेहरू समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को अब नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) लेने और छोड़ने का विकल्प हर साल मिलेगा। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने इस संबंध में सभी डीन को आदेश जारी किया है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले वे प्राइवेट प्रैक्टिस के बाद भी एनपीए ले रहे हैं तो चाहकर भी इसे नहीं छोड़ सकते थे।

Medical College: सैकड़ों फैकल्टी को मिली राहत

अगर किसी ने एनपीए लेना बंद कर दिया है और प्रैक्टिस भी छोड़ दिया है तो फिर से एनपीए के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे। 2024 में प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एनपीए विवाद में 40 से अधिक डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी थी। इनमें से ज्यादातर संविदा में सेवाएं दे रहे थे।

डॉक्टरों का कहना है कि शासन अगर हर साल एनपीए लेने व छोडऩे का विकल्प दें तो यहां भी डॉक्टरों की सूची अपडेट होती रहेगी। मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को हर साल एनपीए लेने व छोडऩे का विकल्प मिलता है। प्रदेश में केवल प्रमोशन के समय यह विकल्प मिलता है। अब इस नियम में बदलाव किया गया है, जिससे सैकड़ों फैकल्टी को राहत मिली है।

हर माह 28 से 40 हजार एनपीए

डॉक्टरों को हर माह 28 से 40 हजार रुपए एनपीए मिलता है। शासन ने 4 अक्टूबर 2024 को सीजीडीएमई की वेबसाइट में एनपीए लेने वाले डॉक्टरों की सूची अपलोड कर दी थी। यानी सूची सार्वजनिक की गई थी। कोई भी व्यक्ति वेबसाइट पर जाकर कॉलेजवार डॉक्टरों के नाम देख सकता है। पत्रिका को कुछ डॉक्टरों ने एनपीए लेने के बाद भी नहीं छोड़ पाने की तकनीकी समस्या बताई थी।

उनका कहना था कि शासन प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती तो कर रहा है, लेकिन एनपीए लेने व छोडऩे के विकल्प के लिए कोई सिस्टम ही नहीं बना पाया था। ऐसे में वे चाहकर भी प्रैक्टिस करने के बाद एनपीए ले रहे हैं। मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिलकर एनपीए लेने व छोडऩे का विकल्प हर साल देने की मांग भी की थी।

एनपीए लेकर प्रैक्टिस करते हैं, सोचते हैं कोई नहीं जानता

एनपीए लेकर भी प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की सोच है कि आम लोगों को भला इसकी जानकारी कैसे होगी? यहां तक कि कलिग (सहकर्मी) को इसका पता नहीं रहता। एक प्रोफेसर प्रैक्टिस करते हैं और पूछने पर कहते हैं कि अस्पताल उनकी पत्नी के नाम पर है।

सूची सवा साल पहले सार्वजनिक की गई है। वरना नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तो एनपीए लेने वाले डॉक्टरों का नाम तो आरटीआई में भी गोपनीय जानकारी बताकर देने से इनकार कर चुका है। एनपीए को लेकर कुछ डॉक्टरों में असंतोष भी है। ऐसा करना सही नहीं है। नैतिकता के नाते प्रैक्टिस कर रहे हैं तो एनपीए नहीं लेना चाहिए।

ट्रांसफर होने से नुकसान तो एनपीए क्यों न लें

Medical College: नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि कैसे रायपुर से किसी डॉक्टर का ट्रांसफर होने पर एनपीए नहीं लेने से नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर किसी डॉक्टर का रायगढ़ या जगदलपुर ट्रांसफर हो जाए तो वे प्रैक्टिस करने रायपुर तो नहीं आ सकते। ऐसे में उन्हें एनपीए लेना ही होगा, नहीं तो बड़ा नुकसान होगा।

हालांकि जानकारों का कहना है कि डॉक्टर सभी अंगुली घी में रखना चाहते हैं, जिससे उन्हें कोई नुकसान न हो। पड़ताल में पता चला है कि रायपुर मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से जमे डॉक्टर एनपीए लेकर भी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनमें मरीजों के इलाज से लेकर सर्जरी व पैथोलॉजी लैब खोलकर ब्लड जांच करना शामिल है। ऐसे में डॉक्टरों का तर्क आधा सच ही लगता है।