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रायपुर, Jun 04, 2026

नया शिक्षा सत्र बिना किताबों के होगा शुरू, सामने आई ये बड़ी वजह, लाखों छात्रों पर असर

Raipur News: नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन रायपुर जिले के स्कूलों में इस बार भी किताबों की कमी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।

Chhattisgarh News

नया शिक्षा सत्र बिना किताबों के होगा शुरू (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

रायपुर@ अनुराग सिंह। Chhattisgarh News: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन रायपुर जिले के सभी स्कूलों तक पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है। जिले के चार विकासखंडों में पहली से 9वीं तक के लगभग 3.50 लाख विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जाना है।

इसके लिए स्कूलों तक किताबें पहुंचाने का काम जारी है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यार्थियों के हाथों में किताबें पहुंचना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार, स्कूलों में पहले अभ्यास पुस्तिका दी जा रही है। उसके बाद किताबें वितरित की जा रही है।

विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार

जानकारी के अनुसार, जिले के चार विकासखंड रायपुर, धरसींवा, आरंग और अभनपुर में पुस्तक वितरण की प्रक्रिया चल रही है। धरसींवा विकासखंड में पुस्तकों का वितरण कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि आरंग में वितरण अंतिम चरण में है। दूसरी ओर शेष दो विकासखंडों में वितरण की प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि अभी पुस्तकें हाई स्कूलों तक पहुंचाई जा रही हैं, जबकि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में वितरण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में स्कूल खुलने के बाद भी विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार करना पड़ेगा।

अभी भी 50 फीसदी कार्य पूरा नहीं

जानकारों के अनुसार, पाठ्यपुस्तक निगम ने 15 जून तक यानी स्कूल खुलने से पहले सभी स्कूलों में किताबें पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब केवल 12 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में सभी स्कूलों तक किताबें वितरण करना संभव नहीं लगता। रायपुर में ही अब तक 50 फीसदी कार्य पूरा नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में वितरण प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई तो कई स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत बिना पाठ्यपुस्तकों के करनी पड़ सकती है।

हर साल समय पर वितरण का दावा

हर नए सत्र में शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से सत्र शुरू होने से पहले सभी विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाने का दावा किया जाता है ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन हर बार यह पूरा ही नहीं हो पाता। पिछले ही सत्र में भी ऐसा देखने को मिला था। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने तो पुस्तक भी निगम के डीपों से नहीं उठाई थी।

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