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Chhattisgarh Jail News: GST घोटाले के आरोपी को VIP ट्रीटमेंट, पेशी ड्यूटी से हटाए गए सिपाही, जेल प्रशासन सख्त

Chhattisgarh Jail News: 26 करोड़ के जीएसटी घोटाले के आरोपी अमन अग्रवाल सहित अन्य बंदियों को पेशी के दौरान विशेष सुविधाएं देने वाले हवलदार-सिपाहियों को पेशी ड्यूटी से हटा दिया गया है। उन्हें वापस पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इसके अलावा बंदियों से उनकी मिलीभगत की जांच भी शुरू हो गई है। 16 जनवरी […]

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सिपाहियों-बंदियों की मिलीभगत की जांच (photo source- Patrika)

सिपाहियों-बंदियों की मिलीभगत की जांच (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Jail News: 26 करोड़ के जीएसटी घोटाले के आरोपी अमन अग्रवाल सहित अन्य बंदियों को पेशी के दौरान विशेष सुविधाएं देने वाले हवलदार-सिपाहियों को पेशी ड्यूटी से हटा दिया गया है। उन्हें वापस पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इसके अलावा बंदियों से उनकी मिलीभगत की जांच भी शुरू हो गई है। 16 जनवरी को अमन की कोर्ट में पेशी थी।

Chhattisgarh Jail News: पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा ये वीडियो

इस दौरान हवलदार नरोत्तम, सिपाही आसमान व राकेश ने उसे विशेष सुविधाएं मुहैया कराई थी। इसके अलावा नरोत्तम एक अन्य बंदी को मिलाने के लिए अपनी टेबल छोड़कर पहुंचे थे। इसके बाद बंदी और उसके परिजनों को मिलवाया गया। इस दौरान समय पर नहीं मिलवाने को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा भी किया था। उल्लेखनीय है कि नरोत्तम पुलिस चौकी में टेबल प्रभारी थे। वे बंदियों की पेशी के लिए सिपाहियों की ड्यूटी लगाते थे।

पेशी के दौरान बंदियों की सुरक्षा में लापरवाही और परिजनों से मुलाकात कराने संबंधी वीडियो पुलिस अधिकारियों तक भी पहुंचा। इसके बाद अधिकारियों ने इसमें शामिल हवलदार नरोत्तम और अन्य लोगों को पेशी ड्यूटी से हटा दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच प्रशिक्षु आईपीएस मानसी साकोरे कर रही हैं।

चुनिंदा सिपाहियों को ही मिलती है जिम्मेदारी

पुलिस लाइन से कुछ चुनिंदा सिपाहियों और हवलदारों को ही रसूखदार बंदियों की पेशी कराने की जिम्मेदारी मिलती है। पुलिस चौकी से टेबल प्रभारी ही बंदियों की पेशी के लिए सिपाहियों की ड्यूटी लगाते हैं। ऐसे सिपाहियों द्वारा बंदियों को कोर्ट से बाहर भी भेजने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

बदमाशों का भी लगता है जमावड़ा

Chhattisgarh Jail News: कोर्ट परिसर में बंदी और विचाराधीन बंदियों की सुरक्षा ताक पर रहती है। पेशी कराने वाले उनकी हाथकड़ी खोलकर परिजनों से मिलाते हैं। कई लोगों को कार में अपने परिजनों के साथ रहने की भी सुविधा देते हैं। इसके चलते कई बंदी कोर्ट से फरार हो चुके हैं। इसके अलाव आदतन बदमाश और नशेडिय़ों का मजमा भी कोर्ट परिसर में लगा रहता है।