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76 साल बाद भी वही सवाल… क्या हमारा गणतंत्र सच में मजबूत है? कई स्तरों पर सुधार की है जरुरत…

Republic Day 2026: अजय रघुवंशी। संविधान और नागरिक अधिकारों को याद करते हुए हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। मंचों से लेकर विधानसभाओं तक और राजनीति से लेकर नौकरशाही तक हर बार नए संकल्पों की बात होती है, लेकिन जैसे ही साल गुजरता है, हालात फिर वही कहानी दोहराते हैं, जिससे […]

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क्या हमारा गणतंत्र सच में मजबूत है? (photo-AI)

क्या हमारा गणतंत्र सच में मजबूत है? (photo-AI)

Republic Day 2026: अजय रघुवंशी। संविधान और नागरिक अधिकारों को याद करते हुए हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। मंचों से लेकर विधानसभाओं तक और राजनीति से लेकर नौकरशाही तक हर बार नए संकल्पों की बात होती है, लेकिन जैसे ही साल गुजरता है, हालात फिर वही कहानी दोहराते हैं, जिससे साफ दिखता है कि 76 साल बाद भी बेहतर गणतंत्र के लिए गण का मजबूत होना जरूरी है। तंत्र की कमियां दूर करेंगे तभी गण मजबूत होगा।

Republic Day 2026: तंत्र की कमियां दूर करेंगे, तभी गण होगा मजबूत

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अधिकारों की बात काफी नहीं है, बल्कि उन अधिकारों को मीन पर उतारने वाले तंत्र में सुधार सबसे बड़ी चुनौती है। प्रदेश में जर्जर स्कूल, अस्पतालों में इलाज की फरियाद, और प्रशासनिक दफ्तरों में न्याय के लिए जनदर्शन की कतारें, ये सब बताते हैं कि संविधान की शपथ पद संभालने के बाद भी जमीन पर पूरी नहीं हो पाई है।

विभागों में फाइलों का ढेर, आदिवासी अंचलों में सडक़-पानी-बिजली का इंतजार और आम नागरिक का दफ्तर-दर-दफ्तर भटकना इसका आईना है। सच्चाई यह है कि गण को मजबूत होने के लिए तंत्र का सुधरना अनिवार्य है। गणतंत्र दिवस पर सुधार का संकल्प सिर्फ परेड और भाषणों तक न रहे बल्कि व्यवस्था में दिखाई दे, तभी व्यक्ति, परिवार और समाज की तस्वीर बदल सकेगी।

रोजगार की आस में युवा, 11 लाख बेरोजगार

रोजगार विभाग के मुताबिक प्रदेश में रोजगार के लिए जीवित पंजीयन की संख्या पर गौर करें तो इनकी संख्या 11 लाख 39 हजार 656 है। इनमें महिलाओं की संख्या 5 लाख 29 हजार रहै। सिर्फ 5वीं पास से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट लोगों ने ही रोजगार पाने के लिए पंजीयन नहीं कराया बल्कि आईटीआई, पॉलिटेक्निक, बीई, एमबीए सहित तकनीकी और कौशल शिक्षा वाले 3.54 लाख युवा रोजगार की आस लगाएं बैठे हैं।

अस्पतालों में बेड की कमी, 33त्न से ज्यादा एक्सपर्ट नहीं

सरकारी अस्पतालों के हालात पर गौर करें तो मरीज को भर्ती करने के लिए बेड की भारी कमी है, वहीं 33 प्रतिशत से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने की वजह से लोगों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक पूरे नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश के अस्पतालों में डेढ़ लाख से अधिक बेड की कमी दूर नहीं की जा सकी है।

स्कूलों में शिक्षकों की कमी

प्रदेश में स्कूलों और शिक्षकों की स्थिति पर गौर करें स्वीकृत पदों के मुकाबले स्कूलों में शिक्षक कम कार्यरत हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 5500 सरकारी स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे हैं। 16 प्रतिशत सरकारी स्कूल जर्जर हैं, जहां बच्चे खतरों के बीच और बारिश के दिनों में भीगने को मजबूर है। प्रदेश के 30 हजार स्कूलों में मरम्मत के लिए 2000 करोड़ रुपए जारी होने के बाद भी हालात में सुधार नाकाफी है।

खून से लाल हो रही सडक़ें, सुरक्षा नाकाफी

सडक़ें खून से लाल हो रही हैं,लेकिन सडक़ों में सुधार, तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति है। हद तो तब है जब दुर्घटना के बाद वाहन चालक फरार हो रहे हैं। 2023 से लेकर 2025 की स्थिति पर गौर करें तो सडक़ दुर्घटना में ही 41289 लोग घायल हो चुके हैं,वहीं 35761 गंभीर रूप से घायल और 19066 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

बीमारियों से ज्यादा प्रदेश में सडक़ दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है। सडक़ निर्माण में अरबों का बजट, सडक़ सुरक्षा के नाम पर 163 करोड़ रुपए समन शुल्क वसूलने के बाद भी कई गंभीर खामी लोगों की जान ले रही है।

अपराध पर लगाम जरूरी

वर्ष 2025 में राजधानी में 15896 अपराध दर्ज हुए। एक वर्ष के भीतर राजधानी में रेप के 280 केस और 92 लोगों का कत्ल हो चुका है। पुलिस का दावा है कि 2023 और 2024 के मुकाबले वर्ष 2025 में एफआईआर में कमी आई है। इधर इस मामले पर विपक्ष का कहना है कि क्राइम बढ़ा है। अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है। कई मामलों में एफआईआर ही दर्ज नहीं की जाती। नशाखोरी, ड्रग्स पर कोई रोक नहीं है।

अंधविश्वास भी रोड़ा

तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास भी गणतंत्र और संविधान के रास्ते में रोड़ा अटकाए खड़ा है। कोरबा में तांत्रिक क्रिया के दौरान स्क्रैप कारोबारी सहित तीन की मौत ने सवाल खड़े कर दिए। तंंत्र-मंत्र के नाम पर बलात्कार, लूट आदि के भी मामले सामने आए हैं। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।

जनदर्शन में शिकायतों का अंबार

सुशासन की असली परीक्षा नागरिकों की शिकायतों के साथ हो रही है। सुशासन तिहार-2025 पोर्टल में 3 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं और इधर राज्य के जनशिकायत पोर्टल पर ही 36 हजार से ऊपर मामलों का निपटारा लंबित है। पंचायत से लेकर नगरीय प्रशासन तक विभागों में काम न होने की शिकायतों का अंबार है। सरकार की फटकार के बावजूद अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि 33 में से 13 जिलों में शिकायतें 1 लाख के पार पहुंच चुकी हैं।

यातायात पुलिस विभाग एआईजी संजय शर्मा ने कहा की प्रदेश के कुछ दुर्घटनाजन्य स्थानों पर ट्रामा सेंटर बनाने का काम शुरू हो चुका है। सडक़ दुर्घटना कम करने के लिए हमने अलग-अलग विभागों को प्रस्ताव दिया है। लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा ने कहा की गणतंत्र का उद्देश्य लोकतांत्रिक ढंग से सरकार चलाने का सिस्टम है। इसमें अंधविश्वास नहीं बल्कि विश्वास और शासकीय तंत्र की मजबूती की आवश्यकता है, ताकि लोगों को न्याय, अधिकार मिल सके।

रायपुर के अधिवक्ता संघ अध्यक्ष हितेंद्र तिवारी ने कहा की देश का संविधान मौलिक अधिकारों के साथ नागरिकों को कर्तव्य का आह्वान करता है। नागरिक, अधिकारों की तो बात करते हैं, लेकिन कई विषयों पर समाज, शहर और राष्ट्र के कर्तव्यों से विमुख हो जाते हैं। यह सच है कि सरकार की उदासीनता के चलते कई विभागों में लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पाई है।