रायगढ़, May 29, 2026

रंगे हाथ पकड़ा गया सरकारी बाबू (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Bribery Case: रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ अनुविभाग अंतर्गत छाल तहसीलदार कार्यालय में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेते एक लिपिक को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर खसरा के बी-1 दस्तावेज में त्रुटि सुधार करने के नाम पर किसान से 60 हजार रुपए रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की और आरोपी तुलाराम पटेल को रिश्वत लेते पकड़ लिया।
आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जानकारी के अनुसार, ग्राम धसकामुड़ा निवासी किसान भानुप्रताप पटेल अपने खसरा के बी-1 दस्तावेज में त्रुटि सुधार करवाना चाहता था। आरोप है कि इस काम के बदले छाल तहसील कार्यालय में अटैच लिपिक तुलाराम पटेल ने उससे 60 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। किसान ने पहले आरोपी से बातचीत की, लेकिन जब लगातार पैसे की मांग की जाने लगी तो उसने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से कर दी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की। शिकायतकर्ता किसान को आरोपी के पास भेजा गया और जैसे ही रिश्वत का लेन-देन हुआ, मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने आरोपी तुलाराम पटेल को रंगे हाथ पकड़ लिया।
बताया जा रहा है कि आरोपी तुलाराम पटेल मूल रूप से शिक्षक पद पर कार्यरत है, लेकिन वर्तमान में छाल तहसील कार्यालय में लिपिक के रूप में अटैच था। कार्रवाई के दौरान एसीबी अधिकारियों ने मौके से रिश्वत की रकम जब्त कर आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की।
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एसीबी की टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और जमीन संबंधी मामलों में हो रही अवैध वसूली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कामों के लिए किसानों और आम नागरिकों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और कई मामलों में बिना पैसे दिए काम नहीं हो पाता। लोगों का कहना है कि एसीबी की इस कार्रवाई से भ्रष्ट कर्मचारियों में डर जरूर पैदा होगा, लेकिन जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई हो ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
Published on: 29 May 2026 05:02 pm



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