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रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला, बेटियों को अब मुफ्त पास और इलाज की सुविधा

माता-पिता के निधन के बाद बेटियों को अब इलाज और पास के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। नए नियम से उन्हें अस्पताल और यात्रा की सुविधाएं आसानी से मिलेंगी। जिससे उनका जीवन पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान होगा।

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फाइल फोटो पत्रिका

फाइल फोटो पत्रिका

रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद उनके आश्रित बेटियों को चिकित्सा सुविधाओं व रेलवे के पास के लिए दफ्तर के चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को स्पष्ट आदेश जारी किया है। कि ऐसी बेटियां रेलवे परिवार का हिस्सा होंगी। उन्हें वे सभी बुनियादी सुविधाएं मिलती रहेंगी। जो उनके माता पिता को मिलती थीं।

रेलवे कर्मचारियों का उपचार रेलवे हॉस्पिटल में किया जाता है। अब सेकेंडरी फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहीं अविवाहित, विधवा या तलाक शुदा, बेटियों का उम्मीद कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। ताकि वे बिना बाधा के रेलवे अस्पतालों में अपनी सेहत का ख्याल रख सकें। साथ ही विंडो पास बंद नहीं होगा। अब यह पास परिवार की सबसे बड़ी पात्र लाभार्थी बेटी के नाम पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

अभी तक आश्रित बेटियों को नहीं मिल रही थी पास और उम्मीद कार्ड की सुविधा

इसमें अन्य आश्रित भी शामिल हो सकेंगे। अभी तक माता-पिता के निधन के बाद आश्रित बेटियों को पास और उम्मीद कार्ड की सुविधा नहीं मिल रही थी। पिछले तीन साल से रेलवे के संगठन पदाधिकारी मांग कर रहे थे। उस मांग पर अब स्पष्ट निर्देश से रेलकर्मियों के परिवार लाभान्वित होंगे। यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक बड़ी ढाल बनेगा। जो आर्थिक रूप से अपने दिवंगत पिता की पेंशन और सुविधाओं पर निर्भर हैं। रेलवे मेंस यूनियन के पदाधिकारी का कहना है कि संगठन इसकी मांग रेलवे बोर्ड से करता रहा। उत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहां कि यह सुविधा लागू कर दी गई है।