
रायबरेली में पोस्टरों से सियासी संदेश, राहुल–अखिलेश को INDIA गठबंधन का ‘कप्तान’ बताया (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Political Poster: उत्तर प्रदेश के रायबरेली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रस्तावित दो दिवसीय दौरे से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शहर के प्रमुख चौराहों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए पोस्टरों ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। इन पोस्टरों में राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को INDIA गठबंधन के ‘कप्तान’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है, साथ ही 2027 और 2029 के चुनावों का स्पष्ट संकेत दिया गया है।
रायबरेली में लगाए गए पोस्टरों में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बड़ी तस्वीरें हैं, जिनके साथ लिखा गया है कि दोनों नेता आने वाले समय में INDIA गठबंधन का नेतृत्व करेंगे। पोस्टरों में वर्ष 2027 (उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव) और 2029 (लोकसभा चुनाव) का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं को विपक्ष की संयुक्त ताकत के रूप में दर्शाया गया है। इन पोस्टरों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आने वाले चुनावों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की जोड़ी एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी।
रायबरेली राहुल गांधी की संसदीय सीट है और यहां उनका राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव गहरा माना जाता है। ऐसे में उनके दौरे से पहले इस तरह के पोस्टरों का लगना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जहां इससे उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी के समर्थकों में भी इसे विपक्षी एकता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इन पोस्टरों को INDIA गठबंधन की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद अब विपक्ष की नजर सीधे 2027 और 2029 पर टिक गई है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को एक साथ ‘कप्तान’ बताकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विपक्ष आगामी चुनावों में साझा नेतृत्व और साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।
रायबरेली में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में इस पोस्टर अभियान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश कर सकती है। उनका मानना है कि दोनों नेताओं का सामाजिक आधार, युवा समर्थन और राजनीतिक अनुभव मिलकर विपक्ष को नई दिशा दे सकता है।
हालांकि, इन पोस्टरों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्टर किसने और किसके निर्देश पर लगवाए हैं। दोनों दलों के नेता फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे ग्रासरूट लेवल पर कार्यकर्ताओं की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी का रायबरेली में दो दिवसीय दौरा प्रस्तावित है, जिसमें वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे, स्थानीय मुद्दों पर संवाद करेंगे और क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर फीडबैक लेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी आंतरिक चर्चा हो सकती है।
रायबरेली में लगे पोस्टरों ने एक बार फिर विपक्षी एकता की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। 2024 के बाद विपक्ष अब नए सिरे से अपनी भूमिका तय करने में जुटा है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की साझेदारी INDIA गठबंधन के लिए अहम मानी जाती है। पोस्टरों में राहुल और अखिलेश को एक साथ दिखाना इसी साझेदारी को मजबूत करने का प्रतीक माना जा रहा है।
इस पोस्टर अभियान को लेकर भाजपा खेमे में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल पोस्टरों और नारों तक सीमित है, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और है। वहीं विपक्ष समर्थकों का दावा है कि यह आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट है।
पोस्टरों में 2027 और 2029 का स्पष्ट उल्लेख यह दिखाता है कि विपक्ष लंबी राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहा है। 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 में लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘कप्तान’ बताकर कार्यकर्ताओं में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता देने का प्रयास भी माना जा रहा है।
Updated on:
20 Jan 2026 05:25 pm
Published on:
20 Jan 2026 05:21 pm

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