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अखिलेश काल में बरसीं लाठियां…योगी राज में पीटे गए शिष्य, आखिर क्यों विवादों में रहते हैं अविमुक्तेश्वरानंद?

प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। धरना, मारपीट के आरोप और हत्या की साजिश के दावे से वह फिर सुर्खियों में आ गए। आइये जानते हैं कि महाकुंभ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, गणेश प्रतिमा विसर्जन जैसे तमाम समय पर अपने बयान को लेकर सुर्ख़ियों और विवादों में क्यों रहे?

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फोटो सोर्स 1008.Guru X अकाउंट

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फोटो सोर्स 1008.Guru X अकाउंट

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। प्रयागराज के माघ मेले में स्नान के दौरान प्रशासन से टकराव, धरना और हत्या की साजिश के आरोपों ने उनके पुराने विवादों को फिर ताजा कर दिया है।

उत्तराखंड के बद्रीनाथ स्थित ज्योतिर्मठ से जुड़े शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम लंबे समय से विवादों से जुड़ा रहा है। हालिया मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का है। जहां वह मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम स्नान के लिए माघ मेला क्षेत्र पहुंचे थे। उनके साथ बड़ी संख्या में शिष्य और समर्थक भी मौजूद थे।

स्नान की जानकारी तीन दिन पहले दी गई, फिर भी पुलिस ने काफ़िला रोंका

बताया जा रहा है कि जब उनका काफिला घाट की ओर बढ़ा तो प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी बात को लेकर शिष्यों और पुलिस के बीच कहासुनी बढ़ गई। जो बाद में हाथापाई में बदल गई। अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उनके साथ जानबूझकर भगदड़ जैसा माहौल बनाया गया। और यह उनकी हत्या की साजिश हो सकती थी। विरोध में उन्होंने धरना भी दिया। पवित्र स्नान न करने की घोषणा की। उनका कहना था कि स्नान की जानकारी तीन दिन पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी।

महाकुंभ और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में भी शंकराचार्य के बयान से खड़ा हुआ था हंगामा

यह पहला मौका नहीं है। जब अविमुक्तेश्वरानंद विवादों में आए हों। पिछले वर्ष महाकुंभ और राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भी खासा हंगामा मचाया था। उन्होंने अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को राजनीति से प्रेरित बताया था। जिस पर कई धार्मिक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

वसीयत के आधार पर बने ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य

उनकी शंकराचार्य पद पर नियुक्ति भी सवालों के घेरे में रही है। सितंबर 2022 में उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद वसीयत के आधार पर उन्हें ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। हालांकि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कई अखाड़ों ने इस नियुक्ति को मान्यता नहीं दी। और इसे परंपरा के खिलाफ बताया।

राजनीतिक मुद्दों पर उनकी खुली टिप्पणियां के कारण सुर्खियों में बने रहते

राजनीतिक मुद्दों पर उनकी खुली टिप्पणियां भी उन्हें सुर्खियों में रखती हैं। कभी उन्हें किसी दल विशेष का समर्थक बताया जाता है। तो कभी सत्ता के मुखर आलोचक के रूप में देखा जाता है। इससे पहले वर्ष 2015 में वाराणसी में गणेश विसर्जन को लेकर हुए टकराव में वे पुलिस लाठीचार्ज में घायल भी हो चुके हैं। इन तमाम घटनाओं के चलते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार समर्थकों और विरोधियों—दोनों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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