
अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रशासन सख्त | Image - X/@myogiadityanath
Avimukteshwaranand magh mela notice prayagraj: प्रयागराज में माघ मेले और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए दूसरा नोटिस भेजा है। नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन पांटून पुल का बैरियर तोड़ने और भीड़ में बिना अनुमति के बग्घी घुसाने के मामलों पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज ने बताया कि नोटिस बुधवार शाम 7 बजे शिविर के पीछे चस्पा किया गया था, जबकि उस पर 18 जनवरी की तारीख अंकित थी। इसके जवाब में गुरुवार सुबह 8 बजे अविमुक्तेश्वरानंद ने तीन पेज का विस्तृत उत्तर मेला कार्यालय को भेजा। उन्होंने कहा कि प्रशासन नोटिस खेल रहा है और मौनी अमावस्या का स्नान अभी नहीं हुआ है, इसलिए बसंत स्नान पहले नहीं किया जा सकता।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा कि किसी को परंपरा बाधित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि धर्म की आड़ में ऐसे कालनेमि लोग सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कोई चीज नहीं होती और ऐसे लोगों से सतर्क रहना जरूरी है।
प्रशासन ने सवाल किया कि मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने पांटून पुल का बैरियर तोड़ा और बिना अनुमति के बग्घी के साथ संगम स्नान की कोशिश की। इससे भगदड़ का खतरा पैदा हुआ और श्रद्धालुओं को वापस लौटने में कठिनाई हुई। अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया कि कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर अव्यवस्था पैदा की और बाद में आरोप उन्हें डालने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई बग्घी नहीं थी, बल्कि पालकी से स्नान के लिए जा रहे थे और सीसीटीवी में सच्चाई साफ दिख रही है।
प्रशासन ने यह भी सवाल उठाया कि अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड लगाए हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उनके शंकराचार्य होने पर रोक लगाई हुई है। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस मामले में अधिकारी टिप्पणी न करें और उनके वकील की ओर से 20 जनवरी को ई-मेल के जरिए पहले ही जवाब भेजा जा चुका है।
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में संगम स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे अविमुक्तेश्वरानंद नाराज होकर शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। इस घटना ने मेला प्रशासन और संत के बीच विवाद को और बढ़ा दिया है।
Published on:
22 Jan 2026 03:44 pm
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