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Menstrual Leave: भारत में 41% महिलाएं पक्ष में, जापान में 1947 से लागू पर एक फीसदी भी नहीं लेती इसका लाभ

Menstrual Leave: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद भारत में पीरियड लीव को लेकर एक बार फिर से बहस चल पड़ी है। इस बारे में स्त्रीवादी विमर्शकार दो हिस्सों में बंटा हुआ है। आइए यह जानते हैं कि जहां यह लीव कई दशक पहले लागू किया जा चुका है, वहां कितनी फीसदी महिलाएं इसे इस्तेमाल में ला रही हैं।

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Period Leave in India

भारत में पीरियड लीव को लेकर कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है।

Paid Menstrual Leave: देश में पीरियड लीव (Menstrual Leave in India) की मांग के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 13 मार्च 2026 को कहा, 'महिलाओं के लिए अनिवार्य मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) महिलाओं के लिए रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर ऐसा कानून बनाया गया तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।' हालांकि देश के कुछ राज्यों (बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और कुछ हद तक केरल) में पीरियड लीव की व्यवस्था लागू की गई है। आइए जानते हैं कि पीरियड लीव दिए जाने वाले राज्यों और मुल्कों में श्रम में महिलाओं की भागीदारी कितनी प्रतिशत है।

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