
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव। फोटो- IANS
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा की मौत पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एक बड़े सेक्स रैकेट से जोड़ते हुए पुलिस-प्रशासन पर तीखे हमला बोला है। उन्होंने हॉस्टल संचालक मनीष रंजन पर रसूखदार नेताओं और अधिकारियों को लड़कियां सप्लाइ करने का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने दावा किया कि हॉस्टल की आड़ में सेक्स रैकेट का कारोबार चलता था। पुलिस के संरक्षण में यह अवैध धंधे फल-फूल रहा था। पप्पू यादव ने आगे कहा कि पीड़ित परिवार को डराने और उनसे जानकारी छिपाने की कोशिश की गई। उन्होंने सरकार से मांग किया कि पटना के सभी हॉस्टलों और लॉज की गहन जांच होनी चाहिए, क्योंकि वहां आने-जाने वाली बड़ी गाड़ियों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
सांसद ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि डॉ अभिषेक की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि घटना के बाद वे अंडरग्राउंड क्यों हैं? उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों ने ऐसा क्यों किया? इसका जवाब देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सवाल करते हुए पूछा कि पीड़िता को समय रहते रेफर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल, हॉस्टल संचालक और पुलिस के बीच एक गहरा गठजोड़ की वजह से छात्रा की मौत हुई है। पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराई जानी चाहिए।
इधर, आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एएसपी सदर रविवार को प्रभात मेमोरियल अस्पताल पहुंच पूरे मामले की जांच किया। हालांकि, जांच में क्या कुछ मिले। उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया। लेकिन करीब दो घंटे से अधिक समय तक वे अस्पताल में थे। छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर यहां पर ही भर्ती किया गया था। लेकिन, बाद में उसकी तबीयत बिगड़ने पर मेदांता रेफर कर दिया गया था। पुलिस इस पूरे मामले पर रविवार को अस्पताल प्रबंधन से कई सवाल किए। प्रभात मेमोरियल अस्पताल प्रबंधन की ओर से छात्रा की मौत मामले पर संवाददाता सम्मेलन रखा था। लेकिन, अन्तिम समय में इसे रद्द कर दिया गया।
इधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अस्पताल और उसके संचालक डॉ. सतीश कुमार सिंह की सुरक्षा को लेकर डीजीपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का तर्क है कि छात्रा की मौत की जांच कानून के दायरे में हो। लेकिन, कुछ लोग डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा या प्रदर्शन पर उतारू हो गए हैं। इसको देखते हुए अस्पताल और डॉक्टर को सुरक्षा प्रदान किए जाएं।
Published on:
18 Jan 2026 10:56 pm
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