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टेनिस कोर्ट से शुरू हुई पप्पू यादव की एकतरफा प्रेम कहानी, फोटो देख रंजीत बोली थी लड़का कितना मोटा है

पप्पू यादव ने अपनी किताब 'द्रोहकाल का पथिक' में अपनी प्रेम कहानी की चर्चा करते हुए लिखते हैं कि बांकीपुर जेल में रहते हुए शुरू हुई थी। रंजीत रंजन और उनके पिता इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन कैसे लव स्टोरी मुकाम तक पहुंची?

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pappu yadav ranjeet ranjan love story

pappu yadav ranjeet ranjan love story l फोटो- AI

Valentine day specialपप्पू यादव अपनी किताब ‘द्रोहकाल का पथिक'में लिखते हैं कि मेरी प्रेम कहानी बड़ी मुश्किल भरी थी। वे अपनी प्रेम कहानी की चर्चा करते हुए कितााब में लिखते हैं कि इसकी शुरूआत वर्ष 1991 में शुरू हुई। तब मैं पटना के बांकीपुर जेल में बंद था। जेल सुपरिटेडेंट के आवास से सटे मैदान में लड़कों को खेलते देखना मुझे अच्छा लगता था। इन्हीं में से एक लड़का था विक्‍की। विक्की रंजीत का भाई है। वे अपनी किताब में लिखते हैं कि विक्की से खेल के मैदान से ही मेरी नजदीकियां बढ़ गईं। एक दिन विक्की अपनी फैमिली एलबम दिखाई। फैमिली एलबम में ही रंजीत की टेनिस खेलती तस्‍वीर थी। वह तस्वीर देखते ही मुझे रंजीत से प्यार हो गया। पप्‍पू यादव लिखते है कि हमने रंजीत रंजन को पहली बार पटना क्‍लब में देखा था। सेना से रिटायर पिता की बेटी रंजीत रंजन नेशनल व इंटरनेशनल टेनिस खेलतीं थी।

जेल में खास सुविधा मिली हुई थी

‘बिहाइंड बार्स: प्रिजन टेल्स ऑफ इंडियाज मोस्ट फेमस’ के अनुसार जेल में बंद पप्पू यादव को जेल में भी खास सुविधाएं मिली हुई थीं। वो आस- पास के मैदान में खेलने जा सकते थे और जेल सुपरिटेंडेंट के फोन का उपयोग अपने लोगों से बात करने के लिए कर सकते थे। विक्की की बहन रंजीत की तस्वीर देखने के बाद पप्पू यादव जेलर के फोन से रंजीत के घर अक्सर फोन किया करते थे। फोन पर पहले तो सिर्फ आवाज सुनने के लिए ब्लैंक कॉल करते, फिर रंजीत से इधर-उधर की बातें करना भी शुरू कर दीं थी। बिहाइंड बार्स: प्रिजन टेल्स ऑफ इंडियाज मोस्ट फेमस’ के अनुसार रंजीत रंजन को पप्पू यादव ने सबसे पहले पटना क्लब में देखा था। पटना क्लब में पप्पू यादव को एक स्पोर्ट्स इवेंट में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया था। रंजीत ने भी इस इवेंट में हिस्सा लिया था। पप्पू ने जब पहली बार 17 साल की रंजीत को टेनिस खेलते देखा तो वहीं अपना दिल हार बैठे थे।

कितना मोटा लड़का है

एक दफा पप्पू यादव को बोटेनिकल गार्डन के गेस्ट हाउस में नजरबंद किया गया था। अखबार में उनकी खबर छपी थी। रंजीत ने पेपर में पप्पू यादव का फोटो देखकर अपनी मां से कहा था, 'देखो कितना मोटा लड़का है।' दरअसल, रंजीत रंजन की भावनाएं पप्पू से एकदम से अलग थीं। इधर, पप्पू यादव रंजीत के दीवाने हो गए थे। वे हर दिन उन्हें देखना चाहते। रंजीत पटना के मगध कॉलेज में पढ़ाई करतीं और पटना क्लब टेनिस की प्रैक्टिस करने जातीं। पप्पू यादव को इसकी जब जानकारी मिली तो वो रंजीत रंजन का प्रैक्टिस देखने प्रतिदिन पहुंच जाया करते थे। कोई मैच होता तो पप्पू बिना सिक्योरिटी के ही मोटरसाइकिल से उन्हें देखने पहुंच जाते। जबकि रंजीत इस सबसे बेखबर थी।

रंजीत के इनकार पर पप्पू ने खा ली थी नींद की गोलियां

पप्पू यादव अपनी आत्मकथा, ‘द्रोहकाल का पथिक’ लिखते हैं कि बार-बार कोशिश करने के बाद भी रंजीत उनके प्रपोजल को ठुकराती रहीं तो एक दिन हमने आवेश आकर बहुत सारी नींद की गोलियां खा लीं। पप्पू को पटना मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। खैर, इससे पप्पू की जान तो नहीं गई, लेकिन रंजीत का दिल पिघल गया। पप्पू यादव इस प्रसंग की चर्चा करते हुए अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह शादी की राह आसान नहीं थी। दोनों के धर्म तो अलग थे ही, ऊपर से रंजीत के पिता गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी थे। उनकी मां को भी चिंता थी कि बेटी कैसे एक हिंदू परिवार में घुल-मिल पाएगी। हालांकि, मेरे परिवार की तरफ से कोई आपत्ति नहीं थी। वे अपने इंटरव्यू में कहा था कि ‘हमारे पिता बहुत खुले विचार वाले थे। उन्हें दूसरी जाति या धर्म में शादी से कोई समस्या नहीं थी।’

अहलूवालिया के कहने पर तैयार हुआ परिवार

पप्पू यादव आगे कहते हैं कि, रंजीत के पिता को मनाने के लिए उनसे बात करने पहुंचे थे। रंजीत के पिता ने उनके सामने एक शर्त रख दी कि शादी करनी है तो उन्हें सिख धर्म अपनाना होगा। दरअसल, रंजीत के पिता ने यह शर्त पप्पू पीछे हटने को लेकर रखी गई थी। लेकिन, रंजीत के प्यार में पागल पप्पू धर्म बदलने को भी तैयार हो गए। इसके बाद रंजीत की मां ने कहा कि बेटी बिहार में नहीं दिल्ली में रहेगी। पप्पू इस बात पर भी राजी हो गए। सभी शर्त मानने पर भी पप्पू को रंजीत से शादी की इजाजत नहीं मिल थी। ‘द्रोहकाल का पथिक’ में पप्पू बताते हैं कि जब उनके पास रंजीत के परिवार को मनाने का कोई रास्ता नहीं था तो राज्यसभा सांसद एस. एस. अहलूवालिया की मदद लिया था। आखिरकार उनके कहने पर रंजीत के माता-पिता शादी के लिए मान गए।

शादी के लिए आ रहा चार्टर्ड प्लेन भटका

‘द्रोहकाल का पथिक’ में पप्पू लिखते हैं कि रंजीत का परिवार शादी के समय नहीं पहुंचा। इसको लेकर सभी लोग परेशान हो गए। मन में कई सवाल होने लगे। यह चिंता भी थी कि इतनी मुश्किल से शादी के लिए परिवार तैयार हुआ… आखिर फिर क्यों नहीं आए। लेकिन, जब वे लोग पहुंचे तो पता चला कि प्लेन उड़ा रहा पायलट रास्ता भटक गया था, इसलिए पूर्णिया पहुंचने में देर हो गई और फिर 6 फरवरी, 1994 को पप्पू यादव और रंजीत की शादी हो गई। शादी के लिए पूरा पूर्णिया सजाया गया था। VIP मेहमानों से लेकर आम लोगों तक के लिए खास इंतजाम किए गए थे। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव भी इस शादी में शामिल होने आए थे।