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साहब ने कोर्ट को दिखाया ठेंगा! जज के आदेश के बाद भी जब्त गाड़ी कर दी नीलाम, DSP और उत्पाद अधीक्षक समेत 4 पर केस

Bihar News: कोर्ट के आदेश के बावजूद बिहार के मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी के एक मामले में जब्त की गई गाड़ी की नीलामी कर दी गई। इस मामले पर पटना हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद, इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) ने केस दर्ज कर लिया है। 

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 14, 2026

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Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से अधिकारियों की मनमानी और न्यायिक आदेशों की सरासर अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शराबबंदी कानून के तहत जब्त की गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को कोर्ट के साफ निर्देशों के बावजूद नीलाम कर दिया गया। इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए पटना हाई कोर्ट ने इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) को FIR दर्ज करने और कार्रवाई करने का आदेश दिया।इसके बाद तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, एक डीएसपी, सकरा थानाध्यक्ष और एक दारोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शराब रखने के आरोप में जब्त हुई थी गाड़ी

यह पूरा मामला 2020 का है। मुजफ्फरपुर के मुशहरी के रहने वाले सुशील कुमार सिंह की स्कॉर्पियो गाड़ी को सकरा पुलिस ने शराब ले जाने के आरोप में जब्त कर लिया था। FIR में पांच बोतल विदेशी शराब बरामद होने की बात कही गई थी। शराबबंदी कानून लागू होने के बाद यह विभाग के लिए एक सामान्य मामला लग रहा था, लेकिन बाद की घटनाओं ने पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया।

विशेष न्यायालय ने दी गाड़ी छोड़ने की अनुमति

गाड़ी के मालिक सुशील कुमार सिंह ने अपनी गाड़ी को छुड़ाने के लिए स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने विचार-विमर्श के बाद याचिका स्वीकार की और सकरा थाना प्रभारी को स्कॉर्पियो वाहन कोर्ट के आदेश पर छोड़ने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद मामला सरल होना चाहिए था, लेकिन इसके बाद प्रशासनिक खेल शुरू हुआ। थानाध्यक्ष ने महीनों तक आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की और पीड़ित को DSP के ऑफिस भेज दिया गया। यहां भी सिर्फ टालमटोल ही किया गया।

पीड़ित को फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद कोर्ट ने सकरा थानाध्यक्ष से जवाब मांगा। कई महीनों बाद थानाध्यक्ष ने कोर्ट को लिखित सूचना दी कि मार्च 2023 में गाड़ी को राज्यसात कर नीलाम कर दिया गया है। यह वही गाड़ी थी जिसे छोड़ने का साफ आदेश कोर्ट ने पहले ही दिया था। दूसरे शब्दों में, जब कोर्ट का आदेश लंबित था, तब गाड़ी नीलाम कर दी गई।

हाई कोर्ट के निर्देश पर EOU ने की FIR

इस खुलासे के बाद, पीड़ित ने उत्पाद विभाग के सामने अपील और रिवीजन याचिकाएं दायर कीं, लेकिन विभाग ने दोनों को खारिज कर दिया। इसके बाद मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेश की अवहेलना और आपराधिक साजिश माना और इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) को फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया।

FIR में क्या?

EOU द्वारा दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने आपराधिक साजिश, कोर्ट की अवमानना ​​और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की आड़ में अवैध रूप से गाड़ी की नीलामी की। सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।


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