13 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पटना में गैस का हाहाकार: ईरान-इजरायल युद्ध की आग से बुझने लगे हॉस्टलों के चूल्हे, 2.5 लाख छात्रों की पढ़ाई पर संकट

LPG गैस सिलेंडर संकट का असर अब पटना के हॉस्टलों में भी दिखने लगा है। कमर्शियल सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण छात्रों के लिए भोजन नहीं बनाया जा पा रहा है। नतीजतन, छात्र और हॉस्टल संचालक दोनों ही परेशान हैं।

3 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Mar 13, 2026

patna lpg crisis, lpg crisis, patna hostel lpg crisis

Patna LPG Crisis (AI Generated Image)

LPG Crisis: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन सप्लाई चेन में आई रुकावट का असर अब भारत के शहरों पर पड़ने लगा है। बिहार की राजधानी पटना में, LPG गैस की भारी कमी ने हॉस्टलों में अफरा-तफरी मचा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि गैस की कमी के चलते हजारों छात्रों के खाने-पीने का इंतजाम खतरे में पड़ गया है,और लगभग 3,000 हॉस्टल बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं। अगर हालात जल्द ही सामान्य नहीं हुए, तो करीब 2,50,000 छात्रों को अपनी पढ़ाई छोड़कर घर लौटने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

हॉस्टलों में गैस का स्टॉक खत्म हो रहा

फिलहाल, पटना के कई हॉस्टल अपने पास मौजूद गैस सिलेंडरों के स्टॉक का इस्तेमाल करके किसी तरह अपना काम चला रहे हैं। लेकिन, हॉस्टल चलाने वालों को इस बात की गहरी चिंता है कि जब गैस का यह मौजूदा स्टॉक खत्म हो जाएगा, तो वे खाना कैसे बनाएंगे। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि अभी तो वे अपने रिजर्व स्टॉक पर निर्भर हैं, लेकिन वे यह अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं कि भविष्य में क्या होगा या वे आगे अपना काम कैसे जारी रख पाएंगे।

हॉस्टल संचालकों का कहना है कि छात्रों को दिन में तीन बार खाना खिलाना उनकी जिम्मेदारी है और यह एक ऐसा काम है जिसे वे अचानक बंद नहीं कर सकते। कई हॉस्टलों में हालात ऐसे हैं कि रसोइए खाली सिलेंडरों को गर्म पानी में डाल रहे हैं, ताकि गैस की आखिरी बूंद तक का इस्तेमाल किया जा सके और वे छात्रों के लिए कम से कम एक बार का खाना तो बना सकें।

ब्लैक में बिक रहा गैस सिलेंडर

पटना के बाजारों में LPG की कमी के बीच, गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी बढ़ गई है। हॉस्टलों और लॉज में रहने वाले छात्रों का कहना है कि खाना पकाने वाली गैस, जिसकी कीमत पहले औसतन 90 रुपये प्रति किलोग्राम थी अब गैर-कानूनी तरीके से 300 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर बेची जा रही है। वहीं, हॉस्टल संचालकों का आरोप है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर जिनकी सरकारी कीमत 2,133 रुपये है, उन्हें अभी ब्लैक मार्केट में 2,300 से 2,500 रुपये के बीच बेचा जा रहा है।

3,000 हॉस्टलों पर संकट के बादल

पटना नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स डेटा के अनुसार, शहर में अभी लगभग 3,035 हॉस्टल चल रहे हैं। इनमें बांकीपुर जोन में 1,959, पाटलिपुत्र जोन में 743, कंकड़बाग जोन में 172, नूतन राजधानी जोन में 149 और अजीमाबाद जोन में 12 हॉस्टल शामिल हैं। इन सभी हॉस्टलों की रसोई पर खाना पकाने वाली गैस की कमी का बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

वैकल्पिक उपायों की तैयारी

यह देखते हुए कि गैस संकट का कोई तत्काल समाधान नजर नहीं आ रहा है, कई हॉस्टल संचालकों ने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। कई हॉस्टलों में, कोयले और लकड़ी से जलने वाले चूल्हे फिर से जलाए जा रहे हैं। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि 100 से 200 छात्रों के लिए इंडक्शन कुकटॉप पर खाना बनाना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है, इसलिए कोयला ही उनके पास एकमात्र बचा हुआ सहारा है।

पढ़ाई पर असर

गैस संकट का छात्रों की पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है। कई छात्रों की परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, ऐसे में खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से उनका ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। कई छात्र खासकर वे जो निजी लॉज में रहते हैं और अपना खाना खुद बनाते हैं इस संकट से इतने परेशान हो गए हैं कि उन्होंने अपने घर लौटना शुरू कर दिया है। छात्रों का तर्क है कि परीक्षा के दिनों में गैस लेने के लिए घंटों कतार में खड़े रहना या 500 रुपये प्रति किलोग्राम की बहुत ज़्यादा कीमत पर गैस खरीदना उनके बस की बात नहीं है।

सरकार का दावा: गैस की कोई कमी नहीं

इस पूरी स्थिति पर पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने कहा कि असल में LPG गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने पुष्टि की कि सभी गैस कंपनियों और वितरकों के पास गैस का पर्याप्त भंडार है और बुकिंग की प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है। जिलाधिकारी ने जनता से अपील की है कि वे घबराकर बुकिंग न करें और अधिकारियों को गैस एजेंसियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई

जिलाधिकारी ने आगे कहा कि अधिकारियों को गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए नियमित रूप से निरीक्षण और छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने साफ किया कि गैस की कालाबाजारी में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि प्रशासन का कहना है कि गैस की आपूर्ति पर्याप्त है, फिर भी जमीनी स्तर पर हॉस्टल संचालकों की चिंताएं जस की तस बनी हुई हैं।