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PUSU Election 2026: जहां से निकले लालू, नीतीश और सुशील मोदी… उस कैंपस में फिर गूंजेगा चुनावी शोर

PUSU Election 2026: पटना यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति के लिए मंच तैयार है। चुनावों की आधिकारिक तारीखों की घोषणा कर दी गई है। पटना यूनिवर्सिटी को बिहार की राजनीति की 'नर्सरी' माना जाता है।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 04, 2026

PUSU Election 2026

PUSU Election 2026 (फोटो- पत्रिका)

PUSU Election 2026: बिहार की राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में एक बार फिर छात्र राजनीति की सरगर्मी तेज होने वाली है। जिस कैंपस से बिहार के सीएम नीतीश कुमार, पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव, पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद जैसे दिग्गज नेता निकले, उसी पटना विश्वविद्यालय में PUSU Election 2026 का बिगुल बज चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके साथ ही पूरे कैंपस में सियासी हलचल शुरू हो गई है।

छात्र संघ चुनाव की घोषणा, आचार संहिता लागू

पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही पिछले सत्र की निर्वाचित छात्र संघ को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। चुनाव की घोषणा होते ही विश्वविद्यालय परिसर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब कैंपस में पोस्टर, नारेबाजी और प्रचार गतिविधियां तय नियमों के दायरे में ही होंगी।

28 फरवरी को वोटिंग और उसी दिन परिणाम

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, छात्र संघ चुनाव के लिए 28 फरवरी 2026 की तारीख तय की गई है। इसी दिन छात्र अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और मतदान समाप्त होने के बाद देर शाम तक नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। यानी वोटिंग और रिजल्ट एक ही दिन आएगा। इससे साफ है कि 28 फरवरी को पटना यूनिवर्सिटी का कैंपस पूरी तरह सियासी रंग में डूबा रहेगा।

नामांकन से लेकर अंतिम सूची तक पूरा शेड्यूल

चुनाव प्रक्रिया के तहत 16, 17 और 18 फरवरी को नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 19 फरवरी को उम्मीदवारों की प्रारंभिक सूची जारी की जाएगी। नामांकन से जुड़ी आपत्तियों और शिकायतों के निपटारे के बाद 21 फरवरी को उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित होगी। इसी के साथ प्रचार का दौर तेज हो जाएगा, जो मतदान से ठीक पहले तक चलेगा।

ग्रिवांस सेल और चुनाव समिति का गठन

छात्र संघ चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष ग्रिवांस सेल का गठन किया है। उम्मीदवार और छात्र चुनाव से जुड़ी किसी भी शिकायत को यहां दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा एक चुनाव समिति भी बनाई गई है, जिसमें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, सलाहकार और प्रेक्षक नियुक्त किए गए हैं। विश्वविद्यालय का दावा है कि चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न कराया जाएगा।

पांच केंद्रीय पदों पर होगा मुकाबला

PUSU चुनाव मुख्य रूप से पांच केंद्रीय पदों के इर्द-गिर्द घूमता है। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों से काउंसिल सदस्यों का भी चुनाव किया जाएगा। हर पद पर कई छात्र संगठनों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलती है, जिससे चुनाव और भी रोचक हो जाता है।

छात्र संगठनों में तेज हुई हलचल

चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से ही विभिन्न छात्र संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन और रणनीति को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है। पिछले चुनावों में ABVP और NSUI जैसे संगठनों की कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। इस बार भी कैंपस में वैसा ही माहौल बनने के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीति की नर्सरी क्यों कहलाता है पटना यूनिवर्सिटी

पटना विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की प्रयोगशाला माना जाता है। यहां की छात्र राजनीति से निकले कई नेता आगे चलकर राज्य और देश की सियासत में बड़े पदों तक पहुंचे हैं। यही वजह है कि हर PUSU चुनाव को सिर्फ छात्र संघ चुनाव नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति की रिहर्सल के तौर पर देखा जाता है।

फरवरी में चुनाव कराने का फैसला क्यों अहम

पिछले सत्र में छात्र संघ चुनाव मार्च के अंत में कराए गए थे, लेकिन इस बार सत्र को नियमित रखने के उद्देश्य से फरवरी में ही चुनाव कराने का फैसला लिया गया है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि शैक्षणिक कैलेंडर पर चुनाव का असर कम पड़ेगा और पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित नहीं होगा।