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पटना, May 26, 2026

MLC चुनाव के ऐलान के साथ ही NDA में हलचल, जीतन राम मांझी ने 1 सीट पर ठोका दावा

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सीटों पर चुनाव की घोषणा के साथ ही एनडीए के भीतर हलचल बढ़ गई है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एनडीए में अपनी पार्टी के लिए 1 सीट पर दावा थोक दिया है। 

jitan ram manjhi on bihar mlc election

जीतन राम मांझी ने सीएम सम्राट चौधरी से की मुलाकात

Bihar MLC Election: भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद (MLC) की खाली हो रही सीटों पर चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत 18 जून 2026 को वोटिंग होगी। इस घोषणा के होते ही राज्य की सियासत और एनडीए में हलचल बढ़ गई है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एनडीए के भीतर अपनी पार्टी के लिए विधान परिषद की एक सीट पर दावा ठोक दिया है।

हमें एक सीट तो मिलनी चाहिए - जीतन राम मांझी

विधान परिषद चुनाव की तारीख आते ही जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और एनडीए के सामने अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मांझी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए एक सीट पर दावा ठोका।

मांझी ने तर्क देते हुए कहा, 'देखिए, मांग तो बहुत पहले से हमारी है। हम विधानसभा में पांच विधायक हैं, हमारे पास एक एमएलसी भी हैं और हम केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। बिहार के सभी जिलों में हमारे कार्यकर्ता किसी भी अन्य दल से कमजोर नहीं हैं। एनडीए के हर चुनाव और प्रदर्शन में हमारे लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इस आधार पर हमारी हिस्सेदारी बनती है और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को कम से कम एक एमएलसी पद मिलना ही चाहिए।'

मांझी ने BJP के सामने रख दी शर्त

जीतन राम मांझी केवल अपनी मांग तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने बीजेपी के सामने एक बड़ी शर्त भी रख दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर उनकी प्रदेश स्तर के नेताओं से कोई अंतिम बात नहीं हुई है। मांझी ने कहा कि वे इस सीट को लेकर सीधे दिल्ली दरबार जाएंगे और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से सीधी बातचीत करेंगे। मांझी ने कहा कि एक सीट मिलने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, जो पूरे एनडीए के हित में होगा।

9 सीटों पर आसानी से कब्जा कर सकता है NDA

चुनाव आयोग के अनुसार, विधायक कोटे की खाली हो रही 9 सीटों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से खाली हुई 1 सीट (उपचुनाव) को मिलाकर कुल 10 सीटों पर राजनीतिक बिसात बिछनी है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से विधान परिषद के एक सदस्य को चुनने के लिए 25 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होती है।

वर्तमान में विधानसभा में एनडीए (BJP, JDU, HAM, लोजपा-आर) के पास बहुमत का मजबूत आंकड़ा है। इस संख्या बल के आधार पर एनडीए गठबंधन कुल 10 सीटों में से 9 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है, जबकि मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) के खाते में सिर्फ 1 सीट जाने की संभावना है। इसी वजह से एनडीए के भीतर सीट हासिल करने के लिए घटक दलों में होड़ मच गई है।

सीट शेयरिंग का मौजूदा फॉर्मूला

फिलहाल एनडीए के भीतर जो शुरुआती फॉर्मूला सामने आ रहा है, उसके तहत खाली हो रही 4 सीटें जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पास ही रहने की उम्मीद है। वहीं, बीजेपी अपने कोटे में 3 सीटें रखने की तैयारी में है। बाकी बची दो सीटों में से एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में जा सकती है, जहां चर्चा है कि चिराग पासवान अपने भांजे को उच्च सदन भेज सकते हैं। वहीं, आखिरी सीट उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के खाते में जा सकती है और इस सीट से मंत्री दीपक प्रकाश उच्च सदन जा सकते हैं।

ऐसे में जीतन राम मांझी द्वारा एक सीट पर दावा ठोकने से NDA के भीतर खींचतान की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि यदि मांझी को कोई सीट दी जाती है, तो घटक दलों में से किसी एक को अपनी एक सीट छोड़नी पड़ेगी। इसके अलावा, केंद्रीय नेतृत्व पर सीधा दबाव डालने के लिए दिल्ली जाने की मांझी की रणनीति ने BJP की चिंताओं को और गहरा कर दिया है, क्योंकि पार्टी पहले से ही कोर कमेटी की बैठकों के दौरान अपने कोटे की सीटों के लिए 70 से अधिक नामों पर विचार-विमर्श कर रही है।

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