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Bihar Bhumi: अब नहीं लटकेगा दाखिल-खारिज! CO की मनमानी पर लगी लगाम, जानिए अब कब रुकेगी आपकी फाइल?

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री के बाद लैंड म्यूटेशन प्रोसेस में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए नीतीश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राजस्व विभाग ने उन कमियों को दूर कर दिया है, जिनका फायदा उठाकर सर्कल ऑफिसर (CO) जानबूझकर मामलों में देरी कर रहे थे।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 03, 2026

bihar bhumi

सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी दाखिल-खारिज की अनिश्चित देरी पर अब सरकार ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से अंचल कार्यालयों में 'मामला लंबित है' या 'कोर्ट में केस चल रहा है' जैसे जुमलों के सहारे फाइलें रोकी जाती थीं। इस स्थिति को खत्म करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसी गाइडलाइन जारी की है, जिससे अब केवल वास्तविक और प्रभावी न्यायिक आदेश की स्थिति में ही राजस्व कार्यवाही रुकेगी, अन्यथा प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।

क्यों लिया गया फैसला?

इस फैसले को लेकर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजस्व प्रशासन का मूल उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवा देना है। उन्होंने माना कि ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ जैसे शब्दों की अलग-अलग व्याख्या के कारण दाखिल-खारिज सहित कई राजस्व मामले अनावश्यक रूप से अटके रहते थे, जिससे आम लोगों का काम प्रभावित होता था। नए निर्देश इसी भ्रम को खत्म करने के लिए लाए गए हैं।

प्रधान सचिव ने जारी किया निर्देश

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा-6(12) में प्रयुक्त शब्दों की अब स्पष्ट व्याख्या मान्य होगी। विभागीय समीक्षा में यह सामने आया था कि अलग-अलग अंचलों में इन शब्दों की भिन्न व्याख्या के कारण दाखिल-खारिज, सीमांकन और भू-मापी जैसे मामलों के निष्पादन में अनावश्यक देरी हो रही थी। नई व्यवस्था का उद्देश्य अंचल स्तर पर भ्रम की स्थिति समाप्त करना और निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता लाना है।

‘सक्षम न्यायालय’ की स्पष्ट परिभाषा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन संस्थाओं को ‘सक्षम न्यायालय’ माना जाएगा। इसमें दिवानी न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता, समाहर्ता, आयुक्त न्यायालय, विधि द्वारा अधिकृत राजस्व न्यायालय और बिहार भूमि न्यायाधिकरण शामिल हैं। इनसे इतर किसी मंच या महज आवेदन के आधार पर मामला सक्षम न्यायालय में लंबित नहीं माना जाएगा।

कब माना जाएगा मामला ‘लंबित’

‘लंबित’ होने की शर्तों को भी साफ कर दिया गया है। कोई मामला तभी लंबित माना जाएगा जब वाद विधिवत स्वीकार हो चुका हो, न्यायालय द्वारा नोटिस निर्गत किया गया हो और साथ ही स्टे ऑर्डर, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा, अथवा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश प्रभावी हो। केवल आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन दाखिल कर देना अब राजस्व कार्यवाही रोकने का आधार नहीं होगा।

राजस्व कार्यवाही कब रुकेगी और कब नहीं

सरकार के निर्देशों के अनुसार, यदि सक्षम न्यायालय का स्पष्ट और प्रभावी स्थगनादेश मौजूद है, तभी दाखिल-खारिज या अन्य राजस्व प्रक्रिया प्रभावित होगी। जहां ऐसा कोई आदेश नहीं है, वहां राजस्व अधिकारी नियमानुसार कार्यवाही जारी रखेंगे। वाद की प्रति प्रस्तुत कर देने मात्र से भी मामला लंबित नहीं माना जाएगा, जब तक उसमें विधिवत एडमिशन अंकित न हो।

आम लोगों को क्या राहत मिलेगी

इन दिशा-निर्देशों के लागू होने से दाखिल-खारिज मामलों में बेवजह की देरी पर रोक लगेगी और वास्तविक खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी। अंचल स्तर पर मनमानी घटेगी, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का दावा है कि इससे राजस्व प्रशासन अधिक जवाबदेह बनेगा और वर्षों से अटकी फाइलें अब ‘लंबित’ के बहाने नहीं रोकी जा सकेंगी।

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