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जयपुर, May 22, 2026

Patrika Podcast : कर्म ही जीवन

जीवन के दो ही पहलू हैं- ज्ञान और कर्म। दोनों ही एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। इन्हीं को ब्रह्म और माया भी कहा गया है।

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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : कर्म ही जीवन : व्यक्ति जीता है मन की इच्छा पूरी करने के लिए। इच्छा व्यक्ति पैदा कर नहीं सकता। सच बात तो यह है कि इच्छा पूरी कर पाना भी उसके हाथ में नहीं है। पुरुष और प्रकृति के हाथ में वह तो बस कठपुतली है। उसके पास मन है, बुद्धि है और कर्म करने के लिए शरीर है। ये तीनों साधन मरणधर्मा भी हैं। माता-पिता इनका निर्माण करते हैं। उनका शरीर भी मरणधर्मा ही होता है। व्यक्ति आत्मरूप है। मरता नहीं है।

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