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जयपुर, May 24, 2026

Patrika Podcast : विवाह की गांठ : मुक्ति के लिए

बुद्धि सोच को व्यक्तिवादी बना देती है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन को अपने संदर्भ में ही जीता है। दर्शक की तरह बात करता है—सही और गलत। बुद्धि भीतर नहीं जा पाती। मन की बात मन को छू लेती है। उसमें अपनापन महसूस होता है। व्यक्ति सुनना चाहता है, सुनाना भी चाहता है।

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Gulab Kothari Article : पति का घर ही पत्नी का भी घर होता है। स्वामी पति और पत्नी स्वामिनी। आज वही घर एक स्थूल इकाई और पराया घर कहलाने लग गया। जैसे कम्पनी खोटे माल को वापिस मंगा लेती है। विवाह में मंत्रों से क्या आदान-प्रदान होता है—कोई नहीं जानता। स्त्री सम्बन्धी सारे कानून, सारे अभियान उसे शरीर से ज्यादा कुछ नहीं मानते। एक के साथ पटरी नहीं बैठी, दूसरे-तीसरे के साथ बैठ जाएगी।

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