भारत, Mar 27, 2026

कर्पूर चंद्र कुलिश जी ने अपने लेख में संविधान की आत्मा, भारतीय संस्कारों की अनदेखी और शासन की जवाबदेही पर गंभीर चिंता जताई। उनका स्पष्ट मत था कि केवल अधिकारों की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, जब तक दायित्वों के पालन की सख्त निगरानी न हो। कुलिश जी मानते थे कि लोकतंत्र तभी मजबूत बन सकता है, जब नागरिक और शासक दोनों अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहें। उनके आलेख में वही मूल प्रश्न उभरता है-क्या हमारा संविधान वास्तव में भारतीय जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक आत्मा के अनुरूप है, या इसमें सुधार की आवश्यकता है?
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Published on: 27 Mar 2026 02:47 pm

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