
जहां ताले नहीं, भरोसा करता है पहरा! 63 गांव, 1500 लोग और एक भी कैदी नहीं… जानें सोनपुर थाना की अनकही कहानी(photo-AI)
Chhattisgarh unique Village: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का सोनपुर थाना अपने आप में अनोखा और प्रेरणादायक उदाहरण है। यहां की हवालात में आज तक कोई बंद नहीं हुआ। पांच साल से इस इलाके में कोई चोरी-लूट, डकैती या गंभीर विवाद का मामला दर्ज नहीं हुआ। यह क्षेत्र 2020 में बना और इसके अंतर्गत आने वाले 63 गांवों में लगभग 1500 लोग रहते हैं।
यह कहानी सिर्फ पुलिस और कानून की नहीं है, बल्कि समुदाय, आपसी विश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भी है। नक्सल प्रभावित इलाके में यह मॉडल यह दिखाता है कि जब लोग एक-दूसरे के साथ सहयोग और भरोसे के साथ रहते हैं, तो अपराध अपने आप कम हो जाता है।
सोनपुर थाने की सबसे खास बात है खाली हवालात। प्रधान आरक्षक दिनेश कुमार तामो बताते हैं कि यहां आज तक कोई शिकायत लेकर नहीं आया। थाने के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। ऐसा लगता है कि हवालात के लिए यहां ताला लगाने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ती। दरअसल, जब पंचायत चुनाव या मतपेटियों के लिए पुलिस को अस्थायी रूप से लोगों को थाने में रखना पड़ा, तब ही हवालात का उपयोग हुआ। इसके अलावा थाने में न तो जमीन विवाद होते हैं और न ही झगड़े।
सोनपुर थाना क्षेत्र के आदिवासी गांवों में सामूहिक निर्णय और पंचायत व्यवस्था ने शांति बनाए रखी है। अगर किसी घर में छोटा विवाद या कोई असहमति होती है, तो पूरे गांव के लोग मिलकर उसका समाधान निकालते हैं। गरपा गांव की सुकमती मेटामी कहती हैं,
“हमारे घरों में ताले नहीं लगते। अगर कोई बीमार पड़ जाए या मजबूरी में बाहर जाना पड़े, तो पूरा गांव उसके घर की रखवाली करता है। पंचों द्वारा लिए गए फैसले सभी मानते हैं। हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे गांव के लिए कोई थाना भी है।”
यह वाकया यह साबित करता है कि सामुदायिक भरोसा और सहयोग यहां के लोगों का जीवन-शैली का हिस्सा है। छोटे विवादों को लोग आपस में हल कर लेते हैं और कानून केवल अंतिम सहारा बनता है।
सोनपुर थाना क्षेत्र नक्सल प्रभावित है, फिर भी पांच साल में केवल 36 मामले दर्ज हुए हैं, और ये सभी नक्सली मुठभेड़ों से जुड़े हैं। चोरी, डकैती या घरेलू झगड़ों जैसी घटनाएं यहां नहीं होतीं। पुलिस अधिकतर दो महीने में एक बार गांवों में दिखती है और ग्रामीण मानते हैं कि उनका काम नक्सलियों की खोज में ही होता है।
सोनपुर थाना यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा केवल पुलिस या थाने की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समुदाय, सामाजिक मान्यता और आपसी भरोसे से भी सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है। यहां के आदिवासी जीवनशैली के लोग सीधे-सादे और सहयोगी हैं, अपने घरों में ताले तक नहीं लगाते। पंचायत प्रणाली के तहत छोटे-मोटे विवादों का समाधान स्थानीय पंचायत के निर्णयों से होता है।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति बीमार या मजबूरी में बाहर जाता है, तो पूरा गांव उसकी देखभाल करता है। यह मॉडल न केवल पुलिस प्रशासन के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे देश के लिए यह संदेश देता है कि स्थानीय समुदाय और सामाजिक नियमों के सहयोग से कानून की मदद के बिना भी शांति और सुरक्षा कायम रखी जा सकती है।
सोनपुर थाना के अनुभव से यह साफ होता है कि पुलिस और कानून के साथ-साथ स्थानीय समाज का भरोसा अपराध कम करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस तरह के समुदाय आधारित मॉडल को अन्य नक्सल प्रभावित या दूरदराज के इलाकों में लागू करने से सुरक्षा, सामाजिक विश्वास और कानून का राज दोनों बनाए रखा जा सकता है। सोनपुर का यह थाना यह संदेश देता है कि यदि समाज में सहयोग, पारदर्शिता और सामूहिक जिम्मेदारी हो, तो अपराध और हिंसा अपने आप कम हो सकती है।
Updated on:
31 Jan 2026 01:14 pm
Published on:
31 Jan 2026 01:13 pm

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