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भीलवाड़ा, Mar 11, 2026

भीलवाड़ा में शीतला अष्टमी की धूम: कहीं श्रद्धा का ‘बासोड़ा’, कहीं ‘मुर्दे की सवारी’ का उल्लास

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी में बुधवार को लोक पर्व शीतला अष्टमी (बासोड़ा) परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। जहां अलसुबह महिलाओं ने ठंडे व्यंजनों से माता की पूजा कर परिवार की खुशहाली मांगी, वहीं दोपहर होते-होते शहर फाल्गुनी मस्ती के रंगों में सराबोर हो गया। भोर में पूजा और बासी भोजन का […]

bhilwara ki holi ka rang ka dhmal

bhilwara ki holi ka rang ka dhmal

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी में बुधवार को लोक पर्व शीतला अष्टमी (बासोड़ा) परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। जहां अलसुबह महिलाओं ने ठंडे व्यंजनों से माता की पूजा कर परिवार की खुशहाली मांगी, वहीं दोपहर होते-होते शहर फाल्गुनी मस्ती के रंगों में सराबोर हो गया।

भोर में पूजा और बासी भोजन का भोग

सूर्योदय के साथ ही पुराने शहर के मुख्य मंदिर सहित आरके कॉलोनी और शिव साईं धाम में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। पारंपरिक वेषभूषा में सजी महिलाओं ने माता को ओलिया, राबड़ी और ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया। मान्यता के अनुसार बच्चों को चर्म रोगों से बचाने के लिए विशेष रूप से 'धोक' लगवाई गई। घर-घर में मेहमानों का स्वागत भी 'घाट के ओलिया' और पापड़-पकोड़ियों से किया गया।

डीजे की धुन पर 'कपड़ाफाड़' होली

दोपहर में भक्ति का रंग फाग में बदल गया। सूचना केंद्र पर युवाओं और पहली बार बड़ी संख्या में युवतियों की टोलियों ने डीजे की धुन पर जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया। शास्त्रीनगर से लेकर सुभाषनगर तक हर गली में 'कपड़ाफाड़' होली और ठिठोली का दौर चला। वहीं, संजय कॉलोनी माहेश्वरी समाज द्वारा विजयसिंह पथिकनगर में ब्रज की होली का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ यूपीएससी में सफल प्रतिभाओं का सम्मान भी हुआ।

आकर्षण का केंद्र:'मुर्दे की सवारी'

शीतला अष्टमी पर भीलवाड़ा की अनूठी परंपरा 'मुर्दे की सवारी' (नकली शवयात्रा) ने सबका ध्यान खींचा। चित्तौड़ वालों की हवेली से निकली इस यात्रा में गम नहीं, बल्कि हास्य का माहौल था। पूरी शवयात्रा के दौरान करीब 200 कट्टों की गुलाल से सड़कें रंगीन हो गईं। अर्थी पर लेटे युवक को नीचे गिराने और कांधा देने की होड़ में युवाओं के बीच नोंकझोंक भी हुई, जिसे पुलिस ने शांत कराया। गुलाल से लदी पिकअप में इलोजी का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। यात्रा बहाला पहुंचकर संपन्न हुई, जहाँ प्रतीकात्मक सनैती का दहन किया गया।

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