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आखिरी दम तक सरहद पर मोर्चा संभालकर अमर हो गए ओमप्रकाश

भीलवाड़ा। जब-जब भारत मां की आन-बान और शान पर कोई आंच आई है, जिले की वीर प्रसूता माटी के बेटों ने अपने रक्त से विजय का तिलक लगाया है। कारगिल युद्ध का वह दौर, जिसने दुश्मनों और घुसपैठियों के लिए जहन्नुम के द्वार खोल दिए थे, भारतीय सेना के उसी अदम्य साहस और पराक्रम की […]

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shadat ko salam at jhajpur bhilwara

shadat ko salam at jhajpur bhilwara

भीलवाड़ा। जब-जब भारत मां की आन-बान और शान पर कोई आंच आई है, जिले की वीर प्रसूता माटी के बेटों ने अपने रक्त से विजय का तिलक लगाया है। कारगिल युद्ध का वह दौर, जिसने दुश्मनों और घुसपैठियों के लिए जहन्नुम के द्वार खोल दिए थे, भारतीय सेना के उसी अदम्य साहस और पराक्रम की अमर दास्तान आज भी जहाजपुर क्षेत्र की हवाओं में गूंजती है।

जहाजपुर तहसील के गाडोली निवासी शहीद ओमप्रकाश परिहार का नाम वीरता के उन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है, जिसे इतिहास कभी नहीं भुला पाएगा। कारगिल युद्ध के अंतिम चरणों में, जब कायर घुसपैठियों ने पीछे से वार किया, तो ओमप्रकाश परिहार एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हो गए। ऑपरेशन विजय के दौरान 4 दिसंबर 2000 को अनंतनाग की पहाड़ियों पर दुश्मन की एक गोली उनके सीने को चीरती हुई निकल गई।

वतन की मोहब्बत का जज्बा

सांसें थम रही थीं, शरीर रक्त रंजित था, लेकिन वतन की मोहब्बत का जज्बा इतना प्रबल था कि उन्होंने तब तक शस्त्र नहीं छोड़े जब तक अंतिम घुसपैठिए को मौत के घाट नहीं उतार दिया। अपनी अंतिम सांस तक लड़ते हुए उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय सैनिक मरना जानता है, पर झुकना नहीं। https://www.dailymotion.com/video/x9y5b8e

शहादत की गवाह गाडोली की माटी

जहाजपुर क्षेत्र का इतिहास सेना के शूरवीरों और शहादत के नाम समर्पित है। गाडोली कस्बा तो वीरता की एक जीवंत पाठशाला बन चुका है। क्षेत्र के अन्य जांबाजों ने भी सीमा पर अपनी वीरता का लोहा मनवाया है। टीकड़ के शिवराम सिंह 30 अगस्त 1998 को राजौरी में वीरगति प्राप्त की। जयराम मीणा ने 9 जुलाई 1998 को राजौरी क्षेत्र में मां भारती के लिए शहीद हुए। जुगराज मीणा (टीकड़), रमेश मीणा (सरसिया) और रतन सिंह मीणा (छाजेला का खेड़ा) जैसे वीरों की शहादत आज भी क्षेत्र के युवाओं के रगों में देशभक्ति का संचार करती है।

सरकार भूल गई शहादत को

शहीद ओम प्रकाश परिहार की शहादत को सरकार ने आज भी सम्मान नहीं दिया । यह पीड़ा वीरांगना मोहनी देवी मीणा की है। उन्होंने बताया कि शहीद ओम प्रकाश परिहार की शहादत को 26 साल बीत गए लेकिन उन्हें सम्मान के तौर पर सरकार ने ना तो शहीद स्मारक बनाया और ना ही शहीद की प्रतिमा लगवाई गई। उनकी इच्छा है कि सरकार इस पर कार्य करें ताकि युवा पीढ़ी व ग्रामीणों को इससे प्रेरणा मिले।

पत्रिका की ओर से किया सम्मान

राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम अभियान के तहत जहाजपुर में वीरांगना मोहनी देवी मीणा का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक गोपीचंद मीणा, नगर पालिका अध्यक्ष नरेश मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, डीएसपी रेवड़मल मौर्य, प्रधान प्रतिनिधि किशोर कुमार शर्मा, भाजपा नगर अध्यक्ष महेंद्र खटीक, राजस्थान पत्रिका भीलवाड़ा संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी अनिल सिंह चौहान तथा जहाजपुर संवाददाता महावीर पुरी मौजूद रहे।