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खुद को अंधेरे से निकाला, अब सैकड़ों युवाओं को वर्दी तक पहुंचाया

कभी मन के अंधेरे से जूझता एक युवक आज सैकड़ों युवाओं के जीवन में उजाले की वजह बन चुका है। यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है, जो टूटने के बाद और मजबूत होकर खड़ा होता है।

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कभी मन के अंधेरे से जूझता एक युवक आज सैकड़ों युवाओं के जीवन में उजाले की वजह बन चुका है। यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है, जो टूटने के बाद और मजबूत होकर खड़ा होता है। बाड़मेर को कर्मभूमि बनाकर जसाई मिलेट्री स्टेशन पर डिफेंस सिविल सेवा में कार्यरत योगाचार्य महिपाल कमेड़िया ने यह साबित कर दिया कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो खुद की पीड़ा भी समाज के लिए शक्ति बन सकती है। पिछले 12 साल में सेना-पुलिस भर्ती में जाने वाले युवाओं के लिए वे नि:शुल्क शारीरिक प्रशिक्षण शिविर लगा रहे हैं। अब तक करीब 450 से ज्यादा युवा सेना, पुलिस, होमगार्ड में भर्ती हो चुके हैं। पिछला शिविर अगस्त से अक्टूबर 2025 में बाड़मेर पीजी कॉलेज में लगाया था। इसमें पचास युवक शामिल थे।

ऐसे हुई शुरुआत

करीब बारह वर्ष पहले महिपाल कमेड़िया मानसिक बीमारी के दौर से गुजर रहे थे। छह माह तक वे भीतर से टूटे रहे। मन अशांत था, शरीर थका हुआ और भविष्य धुंधला। उसी कठिन समय में योग उनके जीवन का सहारा बना। नियमित आसन, प्राणायाम और अनुशासन ने उन्हें फिर से खड़ा किया। खुद को स्वस्थ करने के बाद उन्होंने निश्चय किया कि जिस योग ने उन्हें जीवन लौटाया, वही योग अब दूसरों तक पहुंचाएंगे। स्वामी रामदेव से योग दीक्षा लेकर उन्होंने यह संकल्प बाड़मेर की धरती पर साकार करना शुरू किया।

इस तरह करते हैं तैयार

नौकरी को कमेड़िया ने कभी बाधा नहीं बनने दिया। जब भी सेना भर्ती होती है तो वे इसके तीन महीने पहले से शिविर शुरू करते हैं। इसके लिए वे बिना छुट्टी लिए सुबह पांच से सात बजे तक पीजी कॉलेज और आदर्श स्टेडियम में ट्रेनिंग देते हैं। युवाओं को दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, दंड बैठक, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योग के कठिन अभ्यास सिखाते हैं। कई ऐसे युवा हैं जो हताश होकर तैयारी छोड़ने वाले थे, लेकिन इस प्रशिक्षण के बाद आज वे वर्दी पहनकर देश सेवा कर रहे हैं।

ये युवा दे रहे थल सेना में सेवाएं

- सुखदेव रोपड़िया, जसराज डोगीयाल, रमेशचन्द्र, पूनम थोरी, धनाराम सुथार, उदाराम गोदारा, भागीरथ बैरड़, ठाकराराम, मगराज बेनीवाल,चेतनराम डेलु, मोहन गोदारा, भगाराम साईं, भंवर खोत।