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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का प्रदर्शन

समझौते को कृषि और किसान हितों के खिलाफ बताते हुए सौंपा ज्ञापन ट्रेड डील को लेकर किसानों में बढ़ा आक्रोश

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समझौते को कृषि और किसान हितों के खिलाफ बताते हुए सौंपा ज्ञापन ट्रेड डील को लेकर किसानों में बढ़ा आक्रोश

समझौते को कृषि और किसान हितों के खिलाफ बताते हुए सौंपा ज्ञापन ट्रेड डील को लेकर किसानों में बढ़ा आक्रोश

समझौते को कृषि और किसान हितों के खिलाफ बताते हुए सौंपा ज्ञापन

ट्रेड डील को लेकर किसानों में बढ़ा आक्रोश

नजरपुर. भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नजरपुर क्षेत्र में जिला किसान कांग्रेस कमेटी उज्जैन के अध्यक्ष अशोक जाट ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है और देश की कृषि व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

आयात से फसलों के दाम घटने की आशंका

किसान नेता अशोक जाट ने बताया कि इस व्यापार समझौते के तहत अमेरिका से अनाज, फल और अन्य कृषि उत्पादों का आयात किया जाएगा। इससे भारतीय किसानों द्वारा उगाई गई फसलों की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुनाफाखोर व्यापारी किसानों से कम कीमत पर उपज खरीदकर उसे विदेशी बाजारों में बेच सकते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा किया गया था, यह समझौता उसके विपरीत नजर आता है। किसानों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से पहले सरकार को किसान संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा करनी चाहिए थी।

सैकड़ों किसानों ने प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

समझौते के विरोध में विधानसभा क्षेत्र घटिया के सैकड़ों किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान क्षेत्र के प्रगतिशील किसान, सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। जिला किसान कांग्रेस के पूर्व महासचिव मदन लाल गुजराती ने बताया कि इस समझौते के विरोध में कांग्रेस सहित कई किसान संगठन विभिन्न स्थानों पर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और सरकार से मांग की जाएगी कि वह किसानों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करे।