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नई दिल्ली, Jun 02, 2026

वैज्ञानिक बनने का सपना अधूरा रह गया, जॉइनिंग लेटर से पहले दिल्ली हादसे में गई युवा इंजीनियर की जान

youth Dies Delhi Collapse: दिल्ली के सैदुलाजब में हुए इमारत हादसे में राजस्थान के होनहार छात्र कपिल लवानिया की मौत हो गई। 57वीं गेट रैंक हासिल करने वाले कपिल का 5 दिन पहले ही BARC में साइंटिफिक ऑफिसर पद के लिए चयन हुआ था।

Delhi Saidulajab Building Collapse

जॉइनिंग लेटर से पहले दिल्ली हादसे में गई युवा इंजीनियर की जान

Delhi Saidulajab Building Collapse: दिल्ली के सैदुलाजब इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने कई परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। मलबे में दबकर जान गंवाने वाले छह लोगों में राजस्थान के भरतपुर का 25 साल के होनहार युवक कपिल लवानिया भी शामिल था। कपिल देश सेवा का जज्बा लेकर वैज्ञानिक बनने की बिल्कुल दहलीज पर खड़ा था, लेकिन नियति की क्रूरता ने देश से एक उभरता हुआ वैज्ञानिक और परिवार से उनका इकलौता चिराग हमेशा के लिए छीन लिया। इस दुखद घटना के बाद से उनके पैतृक निवास भरतपुर और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

बर्थडे के दिन ही पूरा हुआ था 'साइंटिस्ट' बनने का सपना' इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, 25 मई को कपिल का 25वां जन्मदिन था। इसी खास दिन मुंबई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के चयनकर्ताओं का पैनल 'साइंटिफिक ऑफिसर' पद के लिए उनका इंटरव्यू ले रहा था। करीब एक घंटे तक चले इस इंटरव्यू में कपिल के शानदार प्रदर्शन से वैज्ञानिक बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने मौके पर ही कपिल को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द ही आधिकारिक ऑफर लेटर भेज दिया जाएगा। जन्मदिन पर करियर की सबसे बड़ी कामयाबी मिलने से बेहद उत्साहित कपिल दिल्ली लौटने के बाद अपने दोस्तों के साथ इस दोहरी खुशी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे थे।

अचानक मातम में बदल गई खुशियां

आपको बता दें कि इंटरव्यू के ठीक पांच दिन बाद यानी 30 मई की शाम को कपिल सैदुलाजब स्थित एक कैंटीन में अपने दोस्तों से मिलने पहुंचे थे। तभी अचानक कैंटीन के बगल में स्थित एक बहुमंजिला इमारत भरभराकर ढह गई। इस मलबे की चपेट में वह कैंटीन भी आ गई, जिसमें कपिल बैठे थे। हादसे से चंद मिनट पहले शाम करीब 7:23 बजे कपिल ने अपनी छोटी बहन रितिका से फोन पर हंसते हुए बात की थी और दोस्तों के साथ पार्टी में जाने का जिक्र किया था। लेकिन करीब आधे घंटे बाद रात 7:55 बजे जब कपिल का दोबारा फोन आया, तो उनकी आवाज बेहद गंभीर और दर्द से कराह रही थी। उन्होंने अपने पिता राजेश लवानिया से कहा, 'पापा, मेरी हालत बहुत खराब है, आप लोग तुरंत आ जाओ, मुझे अस्पताल ले जा रहे हैं।'

कपिल के चाचा मुकेश लवानिया, जो राजस्थान में एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य हैं, ने बताया कि उन्होंने ही कपिल को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की राह दिखाई थी। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि कपिल शुरू से ही मेधावी छात्र था। 12वीं में 85 प्रतिशत अंक लाने के बाद उसने कोटा से जेईई (JEE) की तैयारी की और 97.6 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उसने जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री पूरी की।बीटेक के बाद कपिल गेट (GATE) की तैयारी के लिए दिल्ली आया और महज तीन महीने की रात-दिन की कड़ी मेहनत के बाद ऑल इंडिया 57वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसी बेहतरीन रैंक के बूते वह BARC की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू तक पहुंचा था।

'खानदान का पहला साइंटिस्ट बनने वाला था मेरा बेटा'

भरतपुर में खाद का व्यवसाय करने वाले कपिल के बेबस पिता राजेश लवानिया ने टूटती आवाज में कहा कि मैंने अपना सब कुछ खो दिया। मेरा बेटा हमारे पूरे परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। हमारे पूरे खानदान से आज तक कोई भी वैज्ञानिक नहीं बना था, वह इस मुकाम के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था, लेकिन अपनी मंजिल छूने से पहले ही वह हमें बेसहारा छोड़कर चला गया।

परिजनों का आरोप, इलाज में हुई बड़ी लापरवाही

घायल होने की खबर मिलते ही कपिल का परिवार तुरंत भरतपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था। परिजनों का गंभीर आरोप है कि मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद कपिल को पास के ही एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था, जहां करीब एक घंटे तक उन्हें कोई सही और उचित इलाज नहीं मिला। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर तो किया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते सही प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद देश के इस भविष्य को बचाया जा सकता था।

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