
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की प्रतिवर्ष होने वाली तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार 13 से 15 मार्च को हरियाणा के समालखा में आयोजित होगी। संघ के शताब्दी वर्ष के बीच हो रही इस बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी योजनाओं पर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार संघ की संगठन की संरचना पर भी बैठक में चर्चा की संभावना है।
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक शुक्रवार सुबह 9 बजे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में शुरू होगी। बैठक में संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी, क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक तथा संघ प्रेरित विविध संगठन जैसे मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय सेविका समिति, लघु उद्योग भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और अन्य के कुल 32 विविध संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी सहित कुल 1487 प्रतिनिधि शामिल होंगे। तीन दिन में कई सत्र आयोजित किए जाएंगे जिनमें संघ के कार्य की समीक्षा के साथ ही वर्तमान सामाजिक चुनौतियों और परिस्थितियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
आंबेकर ने बताया कि पिछले संघ शताब्दी वर्ष के दौरान गृह संपर्क और हिंदू सम्मेलन के दौरान लगभग 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक संपर्क किया गया है। एक फरवरी को संत रविदास की 650वीं जयंती थी। इस पर वर्ष भर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और समाज के साथ मिलकर इन्हें आयोजित किया जाएगा।
पिछले एक वर्ष में देशभर में 5500 से अधिक नई शाखाएं शुरू हुई हैं। संघ से जुड़ने के डिजिटल प्लेटफॉर्म जॉइन आरएसएस पर हर साल लगभग 1.25 लाख लोग जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी-फरवरी के दौरान 16,192 लोगों ने इस पर जानकारी भरी थी, वहीं इस वर्ष इसी दौरान 26,445 आवेदन आए हैं। इस वर्ष संघ के स्वयंसेवकों को शिक्षित करने के लिए 97 वर्ग आयोजित किये जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में बड़े निर्णय भी हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि आंतरिक स्तर पर बेहतर समन्वय के लिए प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग और राज्य प्रचारक व्यवस्था लाई जा सकती है। वर्तमान में संघ में संगठन की दृष्टि से 45 प्रांत और 11 क्षेत्र हैं। 11 क्षेत्र को नौ में करने और प्रांत की जगह संभाग व्यवस्था लागू करने पर विचार हो रहा है। उत्तर क्षेत्र का विस्तार कर राजस्थान को भी उसमें शामिल करने और उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश क्षेत्र को एक करने पर विचार किया जा सकता है। नई व्यवस्था में प्रांत स्तर पर होने वाली सभी व्यवस्थाएं संभाग स्तर पर होंगी। प्रशासनिक राज्य स्तर पर राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह रहेंगे। निर्णय के बाद यह व्यवस्था अगले एक वर्ष में लागू होगी।
Updated on:
12 Mar 2026 04:48 pm
Published on:
12 Mar 2026 04:46 pm
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