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नई दिल्ली, Dec 28, 2025

Aravalli hills: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान, CJI की बेंच सोमवार को करेगी सुनवाई

Aravalli hills: अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ करेगी।

Supreme Court took cognizance of the Aravalli hills case on its own

Aravalli hills: सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से संबंधित मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अटॉर्नी जनरल मसीह सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेंगे। बता दें कि जब से सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को पर्वत मानने के लिए नया मानक तैयार किया है, तब से पूरे उत्तर भारत में इसका विरोध किया जा रहा है। अरावली को बचाने के लिए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में लोगों के द्वारा मुहिम भी चलाए जा रहे हैं।

लगभग दो अरब वर्ष पुरानी मानी जाने वाली अरावली पर्वत श्रृंखला का महत्व केवल हरियाणा और राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के लिए भी यह किसी प्राकृतिक वरदान से कम नहीं है। जब तक अरावली का अस्तित्व बना रहेगा, तब तक दिल्ली भीषण गर्मी और पर्यावरणीय संकट से काफी हद तक सुरक्षित रहेगी। सदियों से अरावली पर्वत दिल्ली के लिए एक मजबूत ढाल की तरह खड़ी रही है। यह न केवल तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है, बल्कि रेगिस्तान के विस्तार और प्रदूषण को रोकने में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन चिंता की बात यह है कि अब इसी प्राकृतिक ढाल को कमजोर करने और नष्ट करने की तैयारी की जा रही है।

तत्कालीन CJI गवई की बेंच ने दिया था फैसला

20 नवंबर को अरावली से जुड़े मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अगुवाई वाली पीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया भी शामिल थे। फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि जिन पहाड़ियों की ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है, साथ ही जहां दो पहाड़ियों के बीच की दूरी 500 मीटर तक है, उस पूरे क्षेत्र को अरावली पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत माना जाएगा। इसके अलावा शेष क्षेत्रों को खनन गतिविधियों के लिए अनुमति दी गई थी।

यह निर्णय केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि यदि इन क्षेत्रों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है, तो अवैध खनन की घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका बनी रहेगी।

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