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नई दिल्ली, May 23, 2026

क्या बंद हो जाएगा दिल्ली जिमखाना? जानिए क्यों इस क्लब की मेंबरशिप के लिए करना पड़ता है 37 साल का इंतजार

Delhi Gymkhana Club: दिल्ली के सबसे आलीशान और खास दिल्ली जिमखाना क्लब पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए क्लब की करीब 27 एकड़ की कीमती जमीन को वापस लेने का आदेश दिया है, जिससे देश के सबसे वीआईपी क्लब का भविष्य अब अधर में लटक गया है।

Delhi Gymkhana Club

photo soical media

Government Notice: नई दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहा है। साल 1913 में अंग्रेजों के जमाने में बना यह क्लब अपनी कड़क मखमली घास के मैदानों और रसूखदार सदस्यों के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इस क्लब की 27.3 एकड़ की प्राइम लैंड को वापस अपने कब्जे में लेने का नोटिस जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले ने दिल्ली के सबसे बड़े रसूखदारों और वीआईपी गलियारों में हलचल मचा दी है।

सरकार ने जमीन वापस लेने का क्यों दिया आदेश?

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब को आगामी 5 जून 2026 तक सफदरजंग रोड स्थित पूरा परिसर खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। सरकार का कहना है कि इस रणनीतिक रूप से जरूरी जमीन का इस्तेमाल देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और जनता की सुरक्षा से जुड़े जरूरी कामों के लिए किया जाएगा।

क्यों है 37 साल का वेटिंग पीरियड?

दिल्ली जिमखाना में एंट्री पाना सिर्फ पैसे के बस की बात नहीं है। यहां मेंबरशिप मिलने का वेटिंग पीरियड 37 साल तक का है। यानी जिन लोगों ने 1970 के दशक में अप्लाई किया था, वे आज भी कतार में हैं। यहां मेंबरशिप देने के लिए दौलत से ज्यादा इंसान के रहन-सहन, पारिवारिक बैकग्राउंड और सामाजिक शिष्टाचार जिसे क्लब क्लबेबिलिटी कहता है को देखा जाता है। इसके अलावा यहां सीटों का कोटा भी तय है, जिसमें 40% सिविल सर्वेंट IAS/IPS, 40% सेना के अधिकारी और बचे हुए सिर्फ 20% में बिजनेसमैन या अन्य लोग आते हैं।

विवादों से रहा है पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है जब क्लब सरकार के निशाने पर आया है। इससे पहले भी क्लब पर वित्तीय गड़बड़ियों, भाई-भतीजावाद और बिना इजाजत निर्माण कार्य करने के आरोप लग चुके हैं। इसके अलावा क्लब के ग्रीन कार्ड सिस्टम जिसके तहत सदस्यों के बच्चों को खास सुविधाएं मिलती थीं को भी नियमों के उल्लंघन के चलते बंद कर दिया गया था। सरकार का आरोप यह भी था कि क्लब अपने मूल उद्देश्य खेल-कूद को बढ़ावा देना से भटक गया है।

बदलते भारत में औपनिवेशिक विरासत का अंत?

इस क्लब के भीतर आज भी अंग्रेजों के जमाने का माहौल दिखता है। यहां तुरंत पैसे देने के बजाय साइन करने की पुरानी रीत चलती है और ड्रेस कोड को लेकर कड़े नियम हैं। 1930 के दशक की इमारतों वाले इस क्लब का छिनना दिल्ली के एलीट क्लास के लिए एक बड़ा झटका है। अब देखना यह होगा कि क्या यह इस ऐतिहासिक क्लब का अंत है या सरकार के साथ कोई बीच का रास्ता निकलेगा।

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