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क्या है 25 करोड़ का घोटाला मामला? दिवंगत अजित पवार और पत्नी सुनेत्रा को मिली क्लीन चिट, मुंबई कोर्ट ने की अमह टिप्पणी

Ajit Pawar : मुंबई की सेशन कोर्ट स्थित विशेष अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाले मामले में दिवंगत अजित पवार और पत्नी सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट दी है।

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Clean chit to late Ajit Pawar in Rs 25,000 crore case in mumbai Court

Ajit Pawar : मुंबई की सेशन कोर्ट में स्थित विशेष अदालत ने शुक्रवार को महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल, कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें महाराष्ट्र के दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को क्लीन चिट दी गई थी। इसके साथ ही इस मामले में अदालत ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार भी दिया है।

आपको बता दें कि विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने EOW की ‘सी समरी रिपोर्ट’ को मंजूरी देते हुए कहा कि मामले में किसी भी तरह का आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता। अदालत ने माना कि तथ्यों की गलत व्याख्या के चलते पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इस फैसले से अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी राहत मिली है, क्योंकि EOW ने जांच के बाद उन्हें भी दोषमुक्त पाया था। आम तौर पर जब जांच एजेंसी को मुकदमा चलाने लायक ठोस सबूत नहीं मिलते, तब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाती है।

आपत्तियां भी हुईं खारिज

अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य याचिकाकर्ताओं की अर्जियां भी खारिज कर दीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि जांच के दौरान कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

25 हजार करोड़ का घोटाला मामला क्या है?

यह मामला महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण घोटाले से संबंधित है। आरोप था कि 2007 से 2017 के बीच बैंक ने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ चीनी मिलों और संस्थानों को भारी कर्ज बांटे, जिससे राज्य के खजाने को बड़ा नुकसान हुआ। इस केस में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का नाम सामने आया, क्योंकि उस समय वे बैंक के निदेशक मंडल में शामिल थे। जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने की।

हालांकि, लंबी जांच के बाद EOW ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि आरोपों के समर्थन में ठोस आपराधिक सबूत नहीं मिले और तथ्यों की गलत व्याख्या के कारण मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद अदालत ने रिपोर्ट स्वीकार कर ली और अजित पवार व उनकी पत्नी को क्लीन चिट दे दी। संक्षेप में, यह मामला बड़े पैमाने पर कर्ज वितरण में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था, लेकिन जांच और कोर्ट के फैसले के बाद इसे अपराध सिद्ध न होने के आधार पर बंद कर दिया गया।

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